Agritech India Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/agritech-india/ (प्रयोगशाला से खेत तक, ज्ञान से समृद्धि तक) Fri, 02 Oct 2026 15:39:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.4 https://sansargreen.org/wp-content/uploads/2026/10/Logo-Sansar-Green-Small.png Agritech India Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/agritech-india/ 32 32 प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन सूखे पत्तों से तैयार करेंगे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद https://sansargreen.org/prabhat-khabar-iit-ism-dhanbad-sansar-green-organic-manure-2/ Sat, 19 Sep 2026 11:54:49 +0000 https://sansargreen.org/?p=1933 16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रभात खबर ने IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल को प्रमुखता से दी जगह; किसानों, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती को मिलेगा लाभ धनबाद | 16 सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद Read More ...

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16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रभात खबर ने IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल को प्रमुखता से दी जगह; किसानों, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती को मिलेगा लाभ

धनबाद | 16 सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड की सूखे पत्तों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की पहल को प्रमुख हिंदी समाचार पत्र प्रभात खबर ने अपने धनबाद संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

16 सितंबर 2026 को प्रकाशित खबर में प्रभात खबर ने “आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा” शीर्षक के साथ इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कचरा प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती से जोड़कर प्रस्तुत किया है।

सूखे पत्तों को जलाने के बजाय बनेगी उपयोगी जैविक खाद

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर परिसर में पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की तैयारी कर रहा है।

इस पहल का उद्देश्य सूखी पत्तियों को जलाने या कचरे में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपयोग कर मिट्टी की सेहत सुधारना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।

प्रस्तावित परियोजना के तहत कैंपस और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाली सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से विघटित किया जाएगा। इसके बाद उनमें आवश्यक जैविक पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव मिलाकर गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार करने की योजना है।

इस प्रक्रिया को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व → लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → बेहतर मृदा स्वास्थ्य

IIT (ISM), संसार ग्रीन और जिला कृषि विभाग की सहभागिता

प्रभात खबर ने अपनी रिपोर्ट में इस पहल से जुड़े प्रमुख लोगों और संस्थाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया है।

परियोजना पर हुई चर्चा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक कुमार दास, संसार ग्रीन के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

प्रभात खबर की रिपोर्ट में इस परियोजना को IIT (ISM), संसार ग्रीन और धनबाद के जिला कृषि विभाग के साझा प्रयास से आगे बढ़ाए जाने का उल्लेख किया गया है।

कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना

इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि तैयार जैविक खाद का उपयोग केवल संस्थान के भीतर सीमित रखने की योजना नहीं है।

प्रभात खबर के अनुसार, तैयार खाद का उपयोग संस्थान के उद्यान, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मिट्टी के पुनरुद्धार में किया जा सकेगा।

इसके साथ ही इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है। इस तरह सूखी पत्तियों के प्रबंधन से शुरू होने वाली पहल का लाभ कृषि और मृदा स्वास्थ्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर विशेष ध्यान

संसार ग्रीन की प्रस्तावित प्रक्रिया सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित नहीं है। इसमें वैज्ञानिक रूप से विघटित जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों के साथ लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की परिकल्पना की गई है।

इसका उद्देश्य ऐसा मूल्यवर्धित जैविक उत्पाद तैयार करना है जो मिट्टी में जैविक पदार्थ की उपलब्धता बढ़ाने के साथ मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं को भी सहयोग दे सके।

संसार ग्रीन मृदा स्वास्थ्य, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, जैविक कृषि और जैव-आधारित कृषि समाधानों पर काम कर रहा है। इसलिए यह परियोजना कंपनी के मौजूदा कार्यक्षेत्र को sustainable green-waste management के साथ जोड़ती है।

बड़े संस्थानों के लिए भी बन सकता है मॉडल

प्रभात खबर की रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास के हवाले से सूखी पत्तियों को कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का महत्वपूर्ण स्रोत बताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संस्थान ऐसा मॉडल तैयार करना चाहता है जिसे भविष्य में विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, उद्योगों, हाउसिंग सोसायटियों और नगर निकायों द्वारा भी अपनाया जा सके।

इस दृष्टिकोण से परियोजना का महत्व IIT (ISM) धनबाद परिसर में उत्पन्न सूखी पत्तियों के प्रबंधन से आगे जाता है। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह बड़े परिसरों में उत्पन्न होने वाले green waste के स्थानीय और उपयोगी प्रबंधन का एक उदाहरण बन सकता है।

प्रभात खबर ने किसानों से जुड़े पहलू को किया प्रमुखता से रेखांकित

इस खबर की खास बात यह है कि प्रभात खबर ने परियोजना के पर्यावरणीय पक्ष के साथ किसानों को होने वाले संभावित लाभ को भी अपने मुख्य शीर्षक में स्थान दिया है।

“आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा”—यह शीर्षक परियोजना के Waste-to-Wealth मॉडल के साथ उसके कृषि उपयोग को भी सामने लाता है।

संसार ग्रीन के लिए इस पहल का उद्देश्य भी केवल सूखी पत्तियों का निस्तारण नहीं, बल्कि उनसे ऐसा उपयोगी जैविक संसाधन तैयार करना है जिसे मृदा स्वास्थ्य, पौधरोपण, नर्सरी और जैविक कृषि से जोड़ा जा सके।

Waste to Wealth से मिट्टी की सेहत तक

इस पहल के केंद्र में एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण विचार है—सूखी पत्तियां कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का एक उपयोगी स्रोत हैं।

उन्हें जलाने या फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से संसाधित करके मिट्टी तक वापस पहुंचाया जा सकता है।

सूखी पत्तियां → जैविक संसाधन → पोषक एवं माइक्रोबियल संवर्धन → समृद्ध जैविक खाद → स्वस्थ मिट्टी

प्रभात खबर जैसे प्रमुख समाचार पत्र द्वारा इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और जैविक कृषि से जुड़े इस विषय को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण है।

संसार ग्रीन का प्रयास विज्ञान, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक कार्यान्वयन को जोड़ते हुए ऐसे समाधान विकसित करना है, जिनसे जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और उन्हें पुनः मिट्टी के प्राकृतिक चक्र में लौटाया जा सके।

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Media Coverage: IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green की पहल—सूखी पत्तियों से समृद्ध जैविक खाद https://sansargreen.org/iit-ism-dhanbad-sansar-green-dry-leaf-waste-to-wealth/ Sat, 19 Sep 2026 05:09:34 +0000 https://sansargreen.org/?p=1910 IIT (ISM) परिसर की सूखी पत्तियों को पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में बदलने की दिशा में Sansar Green की पहल धनबाद | सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Read More ...

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IIT (ISM) परिसर की सूखी पत्तियों को पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में बदलने की दिशा में Sansar Green की पहल

धनबाद | सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Private Limited की सूखी पत्तियों को उपयोगी जैविक खाद में बदलने की प्रस्तावित पहल को प्रमुख समाचार माध्यमों में स्थान मिला है।

इस पहल का उद्देश्य आईआईटी (आईएसएम) धनबाद परिसर में बड़ी मात्रा में एकत्र होने वाली सूखी पत्तियों का वैज्ञानिक तरीके से अपघटन कर उन्हें पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में परिवर्तित करना है।

यह प्रयास केवल सूखी पत्तियों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, हरित कचरा प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती और सर्कुलर इकोनॉमी को एक व्यावहारिक “Waste to Wealth” मॉडल से जोड़ने की दिशा में एक पहल है।

सूखी पत्तियों से मृदा के लिए उपयोगी संसाधन

बड़े शैक्षणिक परिसरों, सार्वजनिक संस्थानों, आवासीय परिसरों और अन्य हरित क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी मात्रा में सूखी पत्तियां एकत्र होती हैं। इन पत्तियों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ सकता है, जबकि इन्हें सामान्य कचरे के रूप में हटाने से इनमें मौजूद जैविक पदार्थ का उपयोग नहीं हो पाता।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और Sansar Green की प्रस्तावित पहल इसी जैविक पदार्थ को पुनः मृदा चक्र में लाने की दिशा में काम करेगी।

परिसर से एकत्र सूखी पत्तियों का वैज्ञानिक तरीके से अपघटन किया जाएगा। इसके बाद तैयार जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों और चयनित लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की योजना है, ताकि इसे मृदा और पौधों के लिए उपयोगी जैविक खाद के रूप में विकसित किया जा सके।

प्रस्तावित प्रक्रिया को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व एवं सूक्ष्मजीव संवर्धन → समृद्ध जैविक खाद → बेहतर मृदा स्वास्थ्य

इस प्रकार सूखी पत्तियों को केवल कचरे के रूप में हटाने के बजाय उन्हें एक उपयोगी जैविक संसाधन में बदलने का प्रयास किया जाएगा।

मृदा स्वास्थ्य और माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान

इस पहल से संबंधित रणनीतिक चर्चा में Sansar Green Mission Private Limited के निदेशक राजीव सिंह के साथ आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रो. आलोक कुमार दास, जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल रहे।

Sansar Green के लिए यह पहल कंपनी के मृदा स्वास्थ्य, जैविक कृषि, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक कृषि समाधानों से जुड़े व्यापक कार्य का भी विस्तार है।

Sansar Green और IIT (ISM) Dhanbad के बीच सहयोग केवल सूखी पत्तियों से खाद बनाने की इस पहल तक सीमित नहीं है। अगस्त 2025 में CIIE, IIT (ISM) Dhanbad Foundation और Sansar Green के बीच AI-आधारित जैविक कृषि समाधानों को लेकर रणनीतिक सहयोग की आधिकारिक घोषणा भी की गई थी।

उस पहल में मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण, तकनीक आधारित कृषि समाधान तथा क्षेत्र-विशिष्ट माइक्रोबियल स्ट्रेन का उपयोग कर जैव उर्वरक विकसित करने जैसे विषय शामिल थे।

इस दृष्टि से सूखी पत्तियों से समृद्ध जैविक खाद तैयार करने की नई पहल वैज्ञानिक अनुसंधान, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक पर्यावरणीय समाधान को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक और कदम है।

उत्पादन और संचालन में Sansar Green करेगा निवेश

प्रस्तावित मॉडल की एक महत्वपूर्ण विशेषता IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन है।

प्रकाशित समाचारों के अनुसार, परियोजना के लिए आवश्यक मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और संचालन से संबंधित खर्च Sansar Green द्वारा वहन किए जाने का प्रस्ताव है।

वहीं IIT (ISM) Dhanbad द्वारा उत्पादन इकाई तथा तैयार जैविक खाद के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराने की योजना है।

इस व्यवस्था के माध्यम से संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप की तकनीकी एवं परिचालन क्षमता को एक साझा मॉडल में उपयोग किया जा सकेगा।

लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध होगी जैविक खाद

स्वस्थ मृदा के लिए केवल जैविक पदार्थ की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं होती। मृदा में होने वाली जैविक गतिविधियां और लाभकारी सूक्ष्मजीव भी पोषक तत्वों के चक्र तथा पौधों की वृद्धि से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी कारण प्रस्तावित पहल को सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिक रूप से अपघटित जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की परिकल्पना की गई है।

इससे तैयार जैविक खाद का उपयोग बागवानी, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मृदा सुधार जैसी गतिविधियों में किया जा सकेगा।

परिसर से किसानों और आम लोगों तक

तैयार जैविक खाद का उपयोग IIT (ISM) Dhanbad परिसर के उद्यानों, नर्सरी, पौधरोपण और लैंडस्केपिंग कार्यों में किए जाने की योजना है।

इसके साथ ही प्रकाशित रिपोर्टों में इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों तक उपलब्ध कराने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।

इस प्रकार परियोजना का प्रभाव केवल कैंपस के हरित कचरे के प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे तैयार उपयोगी जैविक उत्पाद को कृषि और बागवानी से जोड़ने की भी संभावना है।

यदि यह मॉडल व्यावहारिक और सफल सिद्ध होता है, तो भविष्य में विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, औद्योगिक परिसरों, आवासीय सोसायटियों और अन्य बड़े परिसरों में उत्पन्न होने वाले जैविक हरित कचरे के प्रबंधन के लिए भी इस तरह के मॉडल पर विचार किया जा सकता है।

Rajeev Singh of Sansar Green with IIT (ISM) Dhanbad representatives during a discussion on converting campus dry leaves into nutrient- and beneficial microorganism-enriched organic manure.
Discussion on the IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green initiative for scientific utilisation of dry leaves to support soil health and sustainable green-waste management.

Waste to Wealth की व्यावहारिक अवधारणा

इस पहल के केंद्र में चार प्रमुख क्षेत्र जुड़े हैं:

Waste to Wealth | Soil Health | Microbial Technology | Circular Economy

इस अवधारणा में सूखी पत्तियों को हटाए जाने वाले कचरे के रूप में देखने के बजाय उनमें मौजूद जैविक पदार्थ को पुनः मृदा में लौटाने योग्य संसाधन के रूप में देखा जाता है।

Sansar Green के लिए यह पहल विज्ञान, सूक्ष्मजीवों और तकनीक के माध्यम से कृषि एवं पर्यावरण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान विकसित करने की दिशा में उसके कार्यों से जुड़ती है।

वहीं IIT (ISM) Dhanbad परिसर इस प्रकार की टिकाऊ तकनीकों और प्रक्रियाओं को विकसित करने तथा व्यावहारिक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान कर सकता है।

कचरे से वापस मिट्टी तक

इस पहल का मूल विचार सरल है—पेड़ से गिरने के बाद सूखी पत्ती का सफर कचरे पर समाप्त होना आवश्यक नहीं है।

वैज्ञानिक अपघटन, पोषक तत्वों के संवर्धन और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग के माध्यम से यही पत्तियां दोबारा मृदा के लिए उपयोगी जैविक संसाधन बन सकती हैं।

सफल क्रियान्वयन की स्थिति में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green की यह पहल यह प्रदर्शित कर सकती है कि संस्थागत स्तर पर उत्पन्न हरित कचरे का प्रबंधन उसके स्रोत के निकट ही करते हुए उससे मृदा और पौधों के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार किया जा सकता है।

यही सर्कुलर इकोनॉमी की मूल भावना भी है—

कचरा एक संसाधन में बदलता है।
जैविक पदार्थ वापस मिट्टी तक पहुंचता है।
लाभकारी सूक्ष्मजीव मृदा की जैविक प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं।
और प्रकृति का चक्र फिर से शुरू होता है।

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दैनिक हिन्दुस्तान में Sansar Green के “Soil to Bazaar” मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान https://sansargreen.org/daily-hindustan-rajeev-singh-sansar-green-soil-to-bazaar-national-recognition/ Wed, 20 May 2026 06:13:00 +0000 https://sansargreen.org/?p=1 24 जुलाई 2026 झारखंड के युवा कृषि उद्यमी एवं Sansar Green के संस्थापक राजीव सिंह के नवाचार “Soil to Bazaar” मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक दैनिक हिन्दुस्तान ने अपने समाचार में इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिससे झारखंड के Read More ...

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24 जुलाई 2026

झारखंड के युवा कृषि उद्यमी एवं Sansar Green के संस्थापक राजीव सिंह के नवाचार “Soil to Bazaar” मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक दैनिक हिन्दुस्तान ने अपने समाचार में इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिससे झारखंड के कृषि नवाचार को देशभर में नई पहचान प्राप्त हुई।

यह उपलब्धि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत आयोजित National Agri Startup Investment and Evaluation Program के दौरान हासिल हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (CCS-NIAM), जयपुर द्वारा किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से चयनित एग्री-स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में राजीव सिंह ने झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए Sansar Green के “Soil to Bazaar” मॉडल की अवधारणा प्रस्तुत की। यह मॉडल किसानों को मिट्टी की जांच से लेकर बाजार तक एकीकृत सेवाएँ उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इसमें वैज्ञानिक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सलाह, जैविक एवं सूक्ष्मजीवी कृषि इनपुट, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, किसान प्रशिक्षण, डिजिटल समाधान और बाजार से सीधा जुड़ाव जैसी सुविधाओं को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है।

इस मॉडल का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की लागत कम करना, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना, आधुनिक तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना तथा किसानों की आय और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि करना है।

दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित समाचार के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत इस नवाचार को कृषि विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों एवं मूल्यांकन समिति के सदस्यों ने सराहनीय पहल माना। विशेषज्ञों ने इसे तकनीक आधारित, टिकाऊ और किसान-केंद्रित कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान Sansar Green की नवाचार-प्रधान कार्यशैली और कृषि क्षेत्र में उसके दीर्घकालिक दृष्टिकोण को और मजबूत बनाती है। यह उपलब्धि इस बात का भी संकेत है कि झारखंड से विकसित कृषि समाधान अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

इस अवसर पर राजीव सिंह ने कहा कि Sansar Green का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादों का निर्माण करना नहीं, बल्कि किसानों के लिए ऐसा समग्र कृषि इकोसिस्टम तैयार करना है, जहाँ विज्ञान, तकनीक, नवाचार और बाजार एक साथ मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दें। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों, विशेषज्ञों, मार्गदर्शकों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी Sansar Green किसानों के हित में नवाचार आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

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