IIT (ISM) परिसर की सूखी पत्तियों को पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में बदलने की दिशा में Sansar Green की पहल
धनबाद | सितंबर 2026
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Private Limited की सूखी पत्तियों को उपयोगी जैविक खाद में बदलने की प्रस्तावित पहल को प्रमुख समाचार माध्यमों में स्थान मिला है।
इस पहल का उद्देश्य आईआईटी (आईएसएम) धनबाद परिसर में बड़ी मात्रा में एकत्र होने वाली सूखी पत्तियों का वैज्ञानिक तरीके से अपघटन कर उन्हें पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में परिवर्तित करना है।
यह प्रयास केवल सूखी पत्तियों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, हरित कचरा प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती और सर्कुलर इकोनॉमी को एक व्यावहारिक “Waste to Wealth” मॉडल से जोड़ने की दिशा में एक पहल है।
सूखी पत्तियों से मृदा के लिए उपयोगी संसाधन
बड़े शैक्षणिक परिसरों, सार्वजनिक संस्थानों, आवासीय परिसरों और अन्य हरित क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी मात्रा में सूखी पत्तियां एकत्र होती हैं। इन पत्तियों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ सकता है, जबकि इन्हें सामान्य कचरे के रूप में हटाने से इनमें मौजूद जैविक पदार्थ का उपयोग नहीं हो पाता।
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और Sansar Green की प्रस्तावित पहल इसी जैविक पदार्थ को पुनः मृदा चक्र में लाने की दिशा में काम करेगी।
परिसर से एकत्र सूखी पत्तियों का वैज्ञानिक तरीके से अपघटन किया जाएगा। इसके बाद तैयार जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों और चयनित लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की योजना है, ताकि इसे मृदा और पौधों के लिए उपयोगी जैविक खाद के रूप में विकसित किया जा सके।
प्रस्तावित प्रक्रिया को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है:
सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व एवं सूक्ष्मजीव संवर्धन → समृद्ध जैविक खाद → बेहतर मृदा स्वास्थ्य
इस प्रकार सूखी पत्तियों को केवल कचरे के रूप में हटाने के बजाय उन्हें एक उपयोगी जैविक संसाधन में बदलने का प्रयास किया जाएगा।
मृदा स्वास्थ्य और माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान
इस पहल से संबंधित रणनीतिक चर्चा में Sansar Green Mission Private Limited के निदेशक राजीव सिंह के साथ आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रो. आलोक कुमार दास, जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल रहे।
Sansar Green के लिए यह पहल कंपनी के मृदा स्वास्थ्य, जैविक कृषि, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक कृषि समाधानों से जुड़े व्यापक कार्य का भी विस्तार है।
Sansar Green और IIT (ISM) Dhanbad के बीच सहयोग केवल सूखी पत्तियों से खाद बनाने की इस पहल तक सीमित नहीं है। अगस्त 2025 में CIIE, IIT (ISM) Dhanbad Foundation और Sansar Green के बीच AI-आधारित जैविक कृषि समाधानों को लेकर रणनीतिक सहयोग की आधिकारिक घोषणा भी की गई थी।
उस पहल में मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण, तकनीक आधारित कृषि समाधान तथा क्षेत्र-विशिष्ट माइक्रोबियल स्ट्रेन का उपयोग कर जैव उर्वरक विकसित करने जैसे विषय शामिल थे।
इस दृष्टि से सूखी पत्तियों से समृद्ध जैविक खाद तैयार करने की नई पहल वैज्ञानिक अनुसंधान, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक पर्यावरणीय समाधान को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक और कदम है।
उत्पादन और संचालन में Sansar Green करेगा निवेश
प्रस्तावित मॉडल की एक महत्वपूर्ण विशेषता IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन है।
प्रकाशित समाचारों के अनुसार, परियोजना के लिए आवश्यक मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और संचालन से संबंधित खर्च Sansar Green द्वारा वहन किए जाने का प्रस्ताव है।
वहीं IIT (ISM) Dhanbad द्वारा उत्पादन इकाई तथा तैयार जैविक खाद के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराने की योजना है।
इस व्यवस्था के माध्यम से संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप की तकनीकी एवं परिचालन क्षमता को एक साझा मॉडल में उपयोग किया जा सकेगा।
लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध होगी जैविक खाद
स्वस्थ मृदा के लिए केवल जैविक पदार्थ की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं होती। मृदा में होने वाली जैविक गतिविधियां और लाभकारी सूक्ष्मजीव भी पोषक तत्वों के चक्र तथा पौधों की वृद्धि से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी कारण प्रस्तावित पहल को सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिक रूप से अपघटित जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की परिकल्पना की गई है।
इससे तैयार जैविक खाद का उपयोग बागवानी, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मृदा सुधार जैसी गतिविधियों में किया जा सकेगा।
परिसर से किसानों और आम लोगों तक
तैयार जैविक खाद का उपयोग IIT (ISM) Dhanbad परिसर के उद्यानों, नर्सरी, पौधरोपण और लैंडस्केपिंग कार्यों में किए जाने की योजना है।
इसके साथ ही प्रकाशित रिपोर्टों में इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों तक उपलब्ध कराने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।
इस प्रकार परियोजना का प्रभाव केवल कैंपस के हरित कचरे के प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे तैयार उपयोगी जैविक उत्पाद को कृषि और बागवानी से जोड़ने की भी संभावना है।
यदि यह मॉडल व्यावहारिक और सफल सिद्ध होता है, तो भविष्य में विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, औद्योगिक परिसरों, आवासीय सोसायटियों और अन्य बड़े परिसरों में उत्पन्न होने वाले जैविक हरित कचरे के प्रबंधन के लिए भी इस तरह के मॉडल पर विचार किया जा सकता है।

Waste to Wealth की व्यावहारिक अवधारणा
इस पहल के केंद्र में चार प्रमुख क्षेत्र जुड़े हैं:
Waste to Wealth | Soil Health | Microbial Technology | Circular Economy
इस अवधारणा में सूखी पत्तियों को हटाए जाने वाले कचरे के रूप में देखने के बजाय उनमें मौजूद जैविक पदार्थ को पुनः मृदा में लौटाने योग्य संसाधन के रूप में देखा जाता है।
Sansar Green के लिए यह पहल विज्ञान, सूक्ष्मजीवों और तकनीक के माध्यम से कृषि एवं पर्यावरण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान विकसित करने की दिशा में उसके कार्यों से जुड़ती है।
वहीं IIT (ISM) Dhanbad परिसर इस प्रकार की टिकाऊ तकनीकों और प्रक्रियाओं को विकसित करने तथा व्यावहारिक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान कर सकता है।
कचरे से वापस मिट्टी तक
इस पहल का मूल विचार सरल है—पेड़ से गिरने के बाद सूखी पत्ती का सफर कचरे पर समाप्त होना आवश्यक नहीं है।
वैज्ञानिक अपघटन, पोषक तत्वों के संवर्धन और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग के माध्यम से यही पत्तियां दोबारा मृदा के लिए उपयोगी जैविक संसाधन बन सकती हैं।
सफल क्रियान्वयन की स्थिति में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green की यह पहल यह प्रदर्शित कर सकती है कि संस्थागत स्तर पर उत्पन्न हरित कचरे का प्रबंधन उसके स्रोत के निकट ही करते हुए उससे मृदा और पौधों के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार किया जा सकता है।
यही सर्कुलर इकोनॉमी की मूल भावना भी है—
कचरा एक संसाधन में बदलता है।
जैविक पदार्थ वापस मिट्टी तक पहुंचता है।
लाभकारी सूक्ष्मजीव मृदा की जैविक प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं।
और प्रकृति का चक्र फिर से शुरू होता है।
