संसार ग्रीन मिशन के प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत की कृषि निर्यात की व्यावहारिक कार्ययोजना
झारखंड के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के रूप में कृषि निर्यात कार्यशाला आयोजित की गई। समेति तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की सहभागिता से आयोजित इस कार्यशाला में कृषि अधिकारियों, विशेषज्ञों और राज्य के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का उद्घाटन कृषि निदेशक, झारखंड, निदेशक, समेति झारखंड और संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को कृषि निर्यात की संभावनाओं, गुणवत्ता मानकों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, प्रमाणीकरण तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराना था।
राजीव सिंह ने प्रस्तुत किया कृषि निर्यात रोडमैप
कार्यशाला के दौरान राजीव सिंह ने झारखंड के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष ‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ प्रस्तुत किया।
इस रोडमैप में राज्य के विशिष्ट कृषि उत्पादों की जिलावार पहचान करने और उन्हें राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की व्यावहारिक रणनीति साझा की गई। प्रस्तुतीकरण में उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और विपणन तक की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत बनाने पर बल दिया गया।
राजीव सिंह ने कहा कि झारखंड के पास विविध कृषि एवं वन उत्पादों का समृद्ध आधार है। उचित योजना, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार संपर्क विकसित करके इन उत्पादों को देश-विदेश के खरीदारों तक पहुँचाया जा सकता है।
झारखंड के उत्पादों में व्यापक निर्यात क्षमता
झारखंड में आलू, इमली, महुआ, आम, कटहल, हल्दी, मिर्च, टमाटर और कई अन्य पारंपरिक कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं निर्यात की व्यापक संभावनाएँ हैं।
इन संभावनाओं को वास्तविक आर्थिक अवसर में बदलने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उत्पादों की गुणवत्ता में निरंतरता, मानकीकरण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और समयबद्ध आपूर्ति भी सुनिश्चित करनी होगी।
झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030 में निम्नलिखित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया:
- प्रत्येक जिले के निर्यात योग्य कृषि उत्पादों की पहचान
- गुणवत्ता परीक्षण, प्रमाणीकरण और उत्पाद की पता लगाने योग्य पहचान
- उपज का वैज्ञानिक संग्रह, ग्रेडिंग और प्रसंस्करण
- निर्यात मानकों के अनुरूप आधुनिक पैकेजिंग
- शीत शृंखला और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं का विकास
- किसान उत्पादक संगठनों के लिए प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा बाजार संपर्क
- डिजिटल माध्यम से मांग, मूल्य और बाजार संबंधी जानकारी
किसान उत्पादक संगठनों की केंद्रीय भूमिका
संसार ग्रीन मिशन का मानना है कि झारखंड के कृषि निर्यात को बढ़ाने में किसान उत्पादक संगठन केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं।
राज्य के अधिकांश किसान छोटे एवं सीमांत वर्ग से आते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर उनके लिए पर्याप्त मात्रा में एकसमान गुणवत्ता वाली उपज तैयार करना, उसका प्रसंस्करण करना और बड़े खरीदारों तक पहुँचना कठिन होता है।
किसान उत्पादक संगठन किसानों को संगठित कर उपज का सामूहिक संग्रह, गुणवत्ता परीक्षण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन सुनिश्चित कर सकते हैं। इससे किसानों की सौदेबाजी क्षमता मजबूत होगी, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

एपीडा और समेति का मार्गदर्शन महत्त्वपूर्ण
कृषि निर्यात की प्रक्रिया में गुणवत्ता प्रमाणीकरण, खाद्य सुरक्षा मानकों, पैकेजिंग, दस्तावेजीकरण और विदेशी बाजारों की आवश्यकताओं को समझना आवश्यक है।
एपीडा का संस्थागत मार्गदर्शन किसान उत्पादक संगठनों और कृषि उद्यमियों को निर्यात प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों, प्रमाणीकरण, पैकेजिंग और संभावित विदेशी बाजारों की जानकारी उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
समेति के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम किसानों, कृषि अधिकारियों और किसान उत्पादक संगठनों को निर्यातोन्मुख कृषि के लिए तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।
डिजिटल तकनीक से मजबूत होगा बाजार संपर्क
संसार ग्रीन मिशन कृषि निर्यात में डिजिटल तकनीक और बाजार सूचना प्रणाली को भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानता है।
डिजिटल मंचों के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों को देश-विदेश के खरीदारों, संस्थागत बाजारों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों से जोड़ा जा सकता है। किसानों को बाजार की मांग, प्रचलित मूल्य, गुणवत्ता आवश्यकताओं और आपूर्ति संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सकती है।
प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली उत्पाद की पहचान, गुणवत्ता निगरानी और आपूर्ति शृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी सहायक हो सकती है।
किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य
‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ का उद्देश्य राज्य के किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को संगठित कर झारखंड के विशिष्ट कृषि उत्पादों को विश्वसनीय पहचान दिलाना है।
बेहतर उत्पादन पद्धतियों, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, आधुनिक पैकेजिंग, मजबूत भंडारण व्यवस्था और प्रभावी बाजार संपर्क के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। इससे राज्य में कृषि उद्यमिता, निवेश, प्रसंस्करण इकाइयों और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
कृषि निदेशक एवं निदेशक, समेति के साथ कार्यशाला का उद्घाटन करना तथा झारखंड के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष रोडमैप प्रस्तुत करना संसार ग्रीन मिशन और उसके प्रबंध निदेशक राजीव सिंह के लिए एक गौरवपूर्ण एवं अविस्मरणीय अवसर रहा।
संसार ग्रीन मिशन भविष्य में भी किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, शोध संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर झारखंड के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार तक पहुँचाने की दिशा में कार्य करता रहेगा।
