Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में प्रकाशित खबरों ने Waste-to-Wealth, Soil Health और Sustainable Green Waste Management की पहल को किया रेखांकित
धनबाद | सितंबर 2026
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और उसके इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Private Limited द्वारा परिसर में गिरने वाली सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में बदलने की प्रस्तावित पहल को विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रमुखता से स्थान मिला है।
Dainik Jagran सहित प्रिंट मीडिया और डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती और Sustainable Waste Management से जोड़ते हुए प्रकाशित किया है। Dainik Jagran की ऑनलाइन रिपोर्ट 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुई, जबकि उपलब्ध समाचार कटिंग में 16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में भी इस विषय को स्थान दिया गया है।

सूखे पत्ते कचरा नहीं, मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन
इस पहल का मूल विचार परिसर में गिरने वाली सूखी पत्तियों को जलाने या सामान्य कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपयोग करना है।
प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से डीकंपोज किया जाएगा और तैयार जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी जैविक खाद विकसित करना है जिसका उपयोग मृदा स्वास्थ्य, पौधरोपण, नर्सरी, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और Soil Restoration जैसे क्षेत्रों में किया जा सके।
यह अवधारणा एक सरल चक्र पर आधारित है:
सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व एवं लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → मिट्टी में वापसी
Dainik Jagran ने प्रमुखता से प्रकाशित की पहल
Dainik Jagran ने “IIT (ISM) की पहल: सूखे पत्ते अब बनेंगे जैविक खाद, पर्यावरण और खेती को मिलेगा लाभ” शीर्षक से इस परियोजना पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की।
रिपोर्ट में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के प्रस्तावित मॉडल के साथ-साथ सूखी पत्तियों के वैज्ञानिक अपघटन, पोषक तत्वों एवं beneficial microorganisms के उपयोग और तैयार खाद के संभावित उपयोगों का उल्लेख किया गया है।
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Dainik Bhaskar में “कचरे में नहीं, खेत और मिट्टी में लौटेंगे सूखे पत्ते”
साझा की गई Dainik Bhaskar की मीडिया कटिंग में पहल को “कचरे में नहीं, खेत और मिट्टी में लौटेंगे सूखे पत्ते, आईआईटी आईएसएम की बड़ी पहल” शीर्षक के साथ प्रस्तुत किया गया है।
रिपोर्ट का मुख्य फोकस इस विचार पर है कि संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाली सूखी पत्तियों में मौजूद जैविक पदार्थ को नष्ट करने के बजाय उसे मिट्टी में वापस लौटाया जाए।
यह दृष्टिकोण Waste-to-Wealth के साथ Circular Economy की उस अवधारणा को भी सामने लाता है, जिसमें जैविक कचरे को उसी चक्र में वापस लाने का प्रयास किया जाता है जहां से वह उत्पन्न हुआ था।
डिजिटल मीडिया में भी मिली जगह
Three Societies ने 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, Sustainable Waste Management, Soil Health और Organic Farming से जोड़कर प्रस्तुत किया।
रिपोर्ट में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green द्वारा सूखे पत्तों से पोषक जैविक खाद तैयार करने की योजना के साथ यह भी बताया गया कि तैयार खाद का उपयोग कैंपस गार्डन, नर्सरी, प्लांटेशन, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और Soil Restoration में किया जा सकता है।
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राजीव सिंह और Sansar Green की भूमिका
इस प्रस्तावित परियोजना पर हुई रणनीतिक चर्चा में IIT (ISM) Dhanbad के Dean, Innovation & Corporate Relations प्रो. आलोक कुमार दास, Sansar Green के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना और IIT (ISM) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।
प्रस्तावित व्यवस्था में मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और अन्य परिचालन खर्च Sansar Green द्वारा वहन किए जाने हैं, जबकि IIT (ISM) Dhanbad उत्पादन और तैयार खाद के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराएगा।
इससे संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप की कार्यान्वयन क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना
इस पहल का उद्देश्य केवल IIT (ISM) परिसर की सूखी पत्तियों का प्रबंधन करना नहीं है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार तैयार खाद का उपयोग कैंपस के उद्यान, नर्सरी, पौधरोपण और लैंडस्केपिंग में करने के साथ किसानों, गार्डनर्स, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है।
यदि यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, औद्योगिक परिसरों, हाउसिंग सोसायटियों और स्थानीय निकायों जैसे बड़े green-waste generators के लिए भी इसी प्रकार के मॉडल की उपयोगिता पर विचार किया जा सकता है। Dainik Jagran में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास ने भी ऐसे व्यापक मॉडल की परिकल्पना का उल्लेख किया है।
IIT (ISM) और Sansar Green के सहयोग का विस्तार
यह पहल IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के बीच पहला सहयोग नहीं है। IIT (ISM) के आधिकारिक अगस्त 2025 प्रेस रिलीज के अनुसार, CIIE, IIT (ISM) Dhanbad Foundation और Sansar Green ने AI-powered organic farming solutions के लिए रणनीतिक सहयोग किया था। इसमें AI-driven soil-health analysis, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार crop recommendations और native microbial strains के आधार पर region-specific biofertilizer production जैसे घटक शामिल थे।
इस संदर्भ में सूखी पत्तियों से enriched organic manure विकसित करने की प्रस्तावित पहल, soil health, microbial technology और sustainable agriculture से जुड़े व्यापक सहयोग का एक व्यावहारिक विस्तार है।
Waste to Wealth से Soil to Sustainability की ओर
Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में मिली कवरेज इस पहल के एक साझा संदेश को सामने लाती है—सूखी पत्तियां केवल कचरा नहीं हैं।
वैज्ञानिक प्रक्रिया, पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के माध्यम से इन्हें दोबारा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।
इस पहल का मूल विचार इसी चक्र में समाहित है:
Waste to Wealth | Soil Health | Beneficial Microorganisms | Organic Farming | Circular Economy
सूखी पत्तियां मिट्टी से आती हैं और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उन्हें उपयोगी जैविक पदार्थ के रूप में दोबारा मिट्टी तक पहुंचाना इस परियोजना की केंद्रीय अवधारणा है।

