Rural Entrepreneurship Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/rural-entrepreneurship/ (प्रयोगशाला से खेत तक, ज्ञान से समृद्धि तक) Fri, 02 Oct 2026 15:37:52 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.4 https://sansargreen.org/wp-content/uploads/2026/10/Logo-Sansar-Green-Small.png Rural Entrepreneurship Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/rural-entrepreneurship/ 32 32 गिरिडीह के TEJAS कार्यक्रम में राजीव सिंह ने युवाओं को दिया उद्यमिता का संदेश https://sansargreen.org/rajeev-singh-tejas-giridih-2026-hindi/ Thu, 01 Oct 2026 04:56:16 +0000 https://sansargreen.org/?p=1958 संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने साझा किए स्टार्टअप, कृषि नवाचार और स्थानीय अवसरों से व्यवसाय खड़ा करने के अनुभव गिरिडीह, 29 सितंबर 2026। गिरिडीह जिला समाहरणालय में आयोजित TEJAS कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध Read More ...

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संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने साझा किए स्टार्टअप, कृषि नवाचार और स्थानीय अवसरों से व्यवसाय खड़ा करने के अनुभव

गिरिडीह, 29 सितंबर 2026। गिरिडीह जिला समाहरणालय में आयोजित TEJAS कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं, उद्यमियों, विद्यार्थियों और स्टार्टअप संस्थापकों को संबोधित करते हुए स्थानीय समस्याओं के समाधान, तकनीक के उपयोग और बाजार की समझ के आधार पर व्यवसाय विकसित करने के व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

“छोटे शहर से शुरुआत हो सकती है, लेकिन सपनों की सीमा छोटी नहीं होनी चाहिए।”

इस संदेश के साथ श्री सिंह ने युवाओं को अपने क्षेत्र की संभावनाएँ पहचानने और छोटे, ठोस कदमों से उद्यमिता की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में उपायुक्त, गिरिडीह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही उप विकास आयुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उद्योग विभाग के महाप्रबंधक, डीपीआईआईटी के प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, व्यवसायी और युवा उद्यमी भी शामिल हुए।

संसार ग्रीन की यात्रा से साझा की उद्यमिता की सीख

श्री राजीव सिंह ने संसार ग्रीन की उद्यमिता यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उपयोगी व्यवसाय की शुरुआत लोगों की वास्तविक जरूरत को समझने से होती है। किसी समस्या का ऐसा समाधान तैयार करना, जिसे लोग आसानी से अपना सकें और जिस पर भरोसा कर सकें, व्यवसाय की मजबूत नींव बनाता है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि किसानों तक समय पर सही सलाह पहुँचाना, गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना और स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार से जोड़ना उद्यमिता के महत्वपूर्ण अवसर हो सकते हैं।

उनके अनुसार, उद्यमी के लिए ग्राहकों से संवाद करना, उनकी कठिनाइयों को समझना और प्रतिक्रिया के आधार पर अपने उत्पाद या सेवा में सुधार करना आवश्यक है।

विचार को व्यवसाय में बदलने के लिए व्यावहारिक कदम जरूरी

अपने संबोधन में श्री सिंह ने स्टार्टअप विकास, नवाचार, व्यवसाय करने में सुगमता, डिजिटल कॉमर्स, तकनीक अपनाने और बाजार से जुड़ाव जैसे विषयों पर विचार रखे।

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि किसी विचार पर बड़े स्तर पर निवेश करने से पहले उसकी उपयोगिता और मांग को परखें। इसके लिए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण कदम बताए:

  • संभावित ग्राहकों से बात करके उनकी जरूरत समझें।
  • छोटे स्तर पर अपने उत्पाद या सेवा का परीक्षण करें।
  • लागत, मूल्य निर्धारण और बाजार की मांग का आकलन करें।
  • भरोसेमंद टीम तैयार करें और ग्राहकों से किए वादे पूरे करें।
  • अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर लगातार सुधार करें।

श्री सिंह ने कहा कि पहला सफल परीक्षण, पहला संतुष्ट ग्राहक और पहला दोबारा मिला ऑर्डर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। इनसे उद्यमी को अपने व्यवसाय की दिशा समझने और आगे के निर्णय लेने में मदद मिलती है।

गिरिडीह और झारखंड में उद्यमिता की संभावनाएँ

श्री राजीव सिंह ने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों, विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं और ग्रामीण उद्योगों में गिरिडीह तथा झारखंड की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने बताया कि स्थानीय उद्यमी अपने क्षेत्र के संसाधनों, जरूरतों और चुनौतियों को करीब से जानते हैं। यह समझ व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण ताकत बन सकती है। इसे तकनीक, गुणवत्ता और बाजार तक पहुँच से जोड़कर ऐसे उद्यम विकसित किए जा सकते हैं जो व्यापक स्तर पर ग्राहकों को सेवाएँ दें।

स्थानीय उत्पाद की बेहतर पैकेजिंग, उपयोगी डिजिटल सेवा या कृषि से जुड़ी किसी आपूर्ति समस्या का समाधान भी एक नए व्यवसाय का आधार बन सकता है। जरूरी है कि समाधान व्यावहारिक हो और ग्राहकों तक विश्वसनीय ढंग से पहुँचाया जा सके।

Rajeev Singh, Founder and Managing Director of Sansar Green, speaking behind a flower-decorated podium with TEJAS signage.
गिरिडीह जिला समाहरणालय में 29 सितंबर 2026 को आयोजित TEJAS कार्यक्रम में युवाओं और उद्यमियों को संबोधित करते संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह। उन्होंने स्थानीय संभावनाओं, कृषि नवाचार और तकनीक के माध्यम से व्यवसाय तथा रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर अपने अनुभव साझा किए।

कृषि, तकनीक और बाजार को जोड़ने की आवश्यकता

संबोधन के दौरान श्री सिंह ने कृषि क्षेत्र में समय पर मार्गदर्शन, विश्वसनीय कृषि सामग्री और मजबूत बाजार संपर्क के महत्व पर जोर दिया।

ये विषय संसार ग्रीन के ‘मिट्टी से मंडी तक’ दृष्टिकोण से भी जुड़े हैं। इस दृष्टिकोण में मिट्टी के स्वास्थ्य, कृषि सामग्री, किसान मार्गदर्शन और बाजार के अवसरों को परस्पर जोड़कर देखा जाता है।

उन्होंने युवाओं को कृषि की पूरी प्रक्रिया में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। खेती से लेकर प्रसंस्करण, पैकिंग और बिक्री तक विभिन्न चरणों में उपयोगी सेवाएँ विकसित की जा सकती हैं।

तकनीक का चयन भी जरूरत के अनुसार होना चाहिए, ताकि वह लोगों का समय बचाए, लागत कम करने में मदद करे या काम को अधिक सुविधाजनक बनाए।

व्यवसाय की प्रगति के साथ दूसरों के लिए भी बनें अवसर

श्री सिंह के संबोधन का एक प्रमुख संदेश था कि उद्यमिता से दूसरों के लिए भी आगे बढ़ने के अवसर पैदा होने चाहिए।

एक विकसित होता व्यवसाय कर्मचारियों, किसानों, आपूर्तिकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं और स्थानीय साझेदारों को काम तथा आय के अवसर दे सकता है। उन्होंने युवाओं को अपने विचारों के आर्थिक पक्ष के साथ उनके सामाजिक योगदान पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

संसार ग्रीन के लिए कृषि, नवाचार और तकनीक को लोगों की आजीविका से जोड़ना उसके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी उपयोगी समाधानों और दीर्घकालिक संबंधों के माध्यम से किसानों, युवाओं तथा ग्रामीण समुदायों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

मार्गदर्शन और सहयोग से मजबूत होगा उद्यमिता का वातावरण

TEJAS कार्यक्रम ने प्रशासन, उद्योग, शिक्षा और स्टार्टअप समुदाय के बीच संवाद का अवसर प्रदान किया।

श्री राजीव सिंह ने निरंतर सीखने, अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन लेने और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। ऐसे संपर्क उभरते उद्यमियों को अपने विचारों का परीक्षण करने, जरूरी जानकारी प्राप्त करने और व्यवसाय की अगली दिशा तय करने में मदद कर सकते हैं।

संसार ग्रीन ने कार्यक्रम में आमंत्रण और विचार साझा करने का अवसर देने के लिए जिला प्रशासन, डीपीआईआईटी के प्रतिनिधियों, उद्योग विभाग तथा सभी आयोजकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

युवाओं के लिए श्री सिंह का संदेश स्पष्ट था—किसी वास्तविक जरूरत को पहचानें, एक उपयोगी समाधान से शुरुआत करें और अनुभव के साथ अपनी क्षमता बढ़ाएँ। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ व्यवसाय भी देशभर में अपनी पहचान बना सकता है।

संसार ग्रीन के बारे में

संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड झारखंड का डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त एग्रीटेक स्टार्टअप है। कंपनी का मुख्यालय रांची में है और गिरिडीह में इसकी गतिविधियाँ संचालित होती हैं।

संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह के नेतृत्व में कंपनी जैविक कृषि सामग्री, मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्मजीव आधारित समाधान, किसान सहयोग और कृषि नवाचार के क्षेत्र में कार्य करती है। अपने ‘मिट्टी से मंडी तक’ दृष्टिकोण के माध्यम से संसार ग्रीन कृषि ज्ञान, उपयोगी उत्पादों और बाजार के अवसरों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

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कृषि शिक्षा से खेत तक: गढ़वा विश्वविद्यालय में राजीव सिंह का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण https://sansargreen.org/rajeev-singh-garhwa-university-agriculture-farmers-rural-entrepreneurship/ Sat, 26 Sep 2026 13:15:52 +0000 https://sansargreen.org/?p=1942 गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में सहभागी राजीव सिंह ने कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, किसानों और ग्रामीण उद्यमिता के बीच मजबूत संबंध विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों Read More ...

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गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में सहभागी राजीव सिंह ने कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, किसानों और ग्रामीण उद्यमिता के बीच मजबूत संबंध विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों में विकसित ज्ञान की वास्तविक सफलता तब है, जब उसका प्रभाव किसान के खेत, ग्रामीण युवाओं के अवसर और स्थानीय अर्थव्यवस्था में दिखाई दे।

संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह की गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में सहभागिता केवल एक औपचारिक शैक्षणिक अवसर नहीं थी। यह उनके उस व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का मंच बनी, जिसमें शिक्षा, कृषि विज्ञान, उद्यमिता और ग्रामीण समाज को एक साझा विकास प्रक्रिया से जोड़ने की परिकल्पना है।

समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह, वरिष्ठ शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय समुदाय की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने शिक्षा और समाज के बीच संबंधों पर व्यापक संवाद का अवसर प्रदान किया।

उद्योग विशेषज्ञ के रूप में राजीव सिंह ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक समुदाय के साथ अपने विचार साझा किए और विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में संस्थागत ज्ञान को जमीनी जरूरतों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।

Rajeev Singh on stage with Jharkhand Governor Santosh Kumar Gangwar, university leadership and dignitaries during the First Convocation of Garhwa University.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के मंच पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विश्वविद्यालय नेतृत्व एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह।

विश्वविद्यालय और किसान के बीच दूरी कम करनी होगी

भारत में कृषि से संबंधित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के पास वैज्ञानिक ज्ञान, शोध क्षमता और विशेषज्ञता का बड़ा आधार मौजूद है। दूसरी ओर किसान प्रतिदिन मिट्टी, मौसम, फसल रोग, उत्पादन लागत, बाजार और बदलती कृषि परिस्थितियों जैसी वास्तविक चुनौतियों का सामना करते हैं।

राजीव सिंह के अनुसार भविष्य की कृषि व्यवस्था में इन दोनों पक्षों के बीच दूरी कम करना आवश्यक है।

उनका दृष्टिकोण एक ऐसे दो-तरफा ज्ञान तंत्र का है, जिसमें वैज्ञानिक केवल किसानों तक तकनीक पहुँचाने तक सीमित न रहें, बल्कि किसान की वास्तविक समस्याएँ भी विश्वविद्यालय और शोधकर्ताओं तक पहुँचें।

खेत समस्या बताए और विज्ञान समाधान खोजने में सहयोग करे—यही प्रभावी कृषि अनुसंधान की दिशा होनी चाहिए।

गिरिडीह के किसानों तक संस्थागत विशेषज्ञता पहुँचाने की सोच

गढ़वा विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध विशेषज्ञता और तकनीकी ज्ञान को गिरिडीह सहित झारखंड के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों तक किस प्रकार पहुँचाया जा सकता है।

इसमें मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ, जैविक एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीक, किसान प्रशिक्षण, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में ज्ञान साझा करने की संभावनाएँ शामिल हैं।

राजीव सिंह का मानना है कि किसान को केवल कृषि उत्पाद उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उसे यह समझने में भी सहयोग मिलना चाहिए कि उसकी मिट्टी की वास्तविक स्थिति क्या है, किस फसल के लिए कौन-सी तकनीक उपयोगी है, उत्पादन लागत कैसे कम की जा सकती है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कैसे हो सकता है।

Rajeev Singh receiving a traditional Tilak and floral welcome at Garhwa University during his participation as an Industry Expert at the First Convocation.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर उद्योग विशेषज्ञ के रूप में पहुंचे संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह का तिलक एवं पुष्पों के साथ पारंपरिक स्वागत।

“प्रयोगशाला से खेत तक पहुँचना चाहिए कृषि नवाचार”

राजीव सिंह के कृषि संबंधी दृष्टिकोण का एक प्रमुख सिद्धांत है कि वैज्ञानिक उपलब्धि का मूल्य उसके व्यावहारिक प्रभाव से तय होना चाहिए।

“कृषि अनुसंधान की यात्रा प्रयोगशाला या शोध पत्र पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। उसकी वास्तविक सफलता किसान के खेत में दिखाई देनी चाहिए। विश्वविद्यालय ज्ञान विकसित करें, उद्यम उसे व्यावहारिक रूप देने में सहयोग करें और किसान उस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में रहे।”

यही सोच विश्वविद्यालय–उद्योग–किसान सहयोग के एक ऐसे मॉडल की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जिसमें प्रत्येक पक्ष अपनी विशिष्ट क्षमता के साथ योगदान करे।

विश्वविद्यालय अनुसंधान और विशेषज्ञता दें, कृषि उद्यम तकनीक को व्यावहारिक तथा सुलभ बनाने में सहयोग करें और किसानों के अनुभव से शोध तथा समाधान दोनों को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ा जाए।

खेती से आगे—ग्रामीण उद्यमिता की नई संभावनाएँ

राजीव सिंह कृषि को केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि ग्रामीण आर्थिक अवसरों के निर्माण से भी जोड़कर देखते हैं।

भारत के ग्रामीण युवाओं के सामने कृषि आधारित उद्यमिता का एक बड़ा क्षेत्र विकसित हो रहा है। जैविक कृषि इनपुट, माइक्रोबियल तकनीक, पौध पोषण, नर्सरी, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन, डिजिटल कृषि सेवाएँ और बाजार संपर्क जैसे क्षेत्रों में नए उद्यम विकसित किए जा सकते हैं।

ऐसे अवसर तभी व्यापक प्रभाव पैदा करेंगे जब युवाओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल, तकनीकी मार्गदर्शन और उद्यमिता की समझ भी मिले।

इसीलिए विश्वविद्यालयों की भूमिका डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहकर छात्रों को वास्तविक कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समस्याओं से जोड़ने की भी हो सकती है।

छात्रों को रोजगार खोजने वाला ही नहीं, अवसर बनाने वाला बनाना

कृषि शिक्षा का भविष्य युवाओं को केवल नौकरी के लिए तैयार करने में नहीं, बल्कि उन्हें समस्या पहचानने, समाधान विकसित करने और उद्यम खड़ा करने की क्षमता देने में भी है।

कृषि विश्वविद्यालय और उद्योग यदि मिलकर छात्रों को किसानों की वास्तविक समस्याओं पर काम करने, फील्ड प्रोजेक्ट करने, तकनीक समझने और कृषि व्यवसाय के मॉडल विकसित करने का अवसर दें, तो ग्रामीण क्षेत्रों से नई पीढ़ी के कृषि उद्यमी तैयार किए जा सकते हैं।

यह मॉडल छात्रों, किसानों और विश्वविद्यालय—तीनों के लिए उपयोगी हो सकता है।

संसार ग्रीन की भूमिका: विज्ञान और किसान के बीच व्यावहारिक सेतु

संसार ग्रीन के माध्यम से राजीव सिंह कृषि विज्ञान और किसान के बीच एक व्यावहारिक सेतु विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

उनका व्यापक उद्देश्य वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, मृदा स्वास्थ्य, जैविक एवं माइक्रोबियल समाधानों, किसान प्रशिक्षण और तकनीक आधारित कृषि सेवाओं को ग्रामीण समुदायों के अधिक करीब लाना है।

शैक्षणिक संस्थानों के साथ संवाद इसी सोच का विस्तार है—जहाँ उद्योग केवल व्यावसायिक भागीदार न होकर ज्ञान को जमीनी प्रभाव में बदलने वाला सहयोगी बने।

विश्वविद्यालय + विज्ञान + उद्यम + किसान

राजीव सिंह भविष्य की कृषि व्यवस्था को चार महत्वपूर्ण स्तंभों के सहयोग के रूप में देखते हैं:

विश्वविद्यालय ज्ञान विकसित करे।
वैज्ञानिक समाधान खोजें।
उद्यम समाधान को व्यावहारिक और सुलभ बनाए।
और किसान पूरी व्यवस्था के केंद्र में रहे।

गढ़वा विश्वविद्यालय में हुआ संवाद इसी सोच को आगे बढ़ाने का अवसर बना।

आगे किसान प्रशिक्षण, विशेषज्ञ संवाद, तकनीकी मार्गदर्शन, छात्रों के लिए कृषि उद्यमिता संबंधी गतिविधियों और संस्थागत ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ ग्रामीण कृषि व्यवस्था के लिए उपयोगी मॉडल विकसित कर सकती हैं।

Rajeev Singh with Vice-Chancellor Dr. M. K. Singh and the university team at Garhwa University during the First Convocation and academic interaction.
गढ़वा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं विश्वविद्यालय की टीम के साथ संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह—कृषि शिक्षा, किसान कल्याण और ग्रामीण उद्यमिता को आगे बढ़ाने पर सार्थक संवाद।

ज्ञान तभी सार्थक है, जब समाज तक पहुँचे

गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में राजीव सिंह की सहभागिता उनके व्यापक सार्वजनिक दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करती है—शिक्षा और संस्थागत ज्ञान का अंतिम उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।

कृषि के संदर्भ में इसका अर्थ है कि शोध किसान तक पहुँचे, तकनीक स्थानीय समस्याओं का समाधान करे, युवाओं को नए अवसर मिलें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक सक्षम बने।

राजीव सिंह इसी दिशा में शैक्षणिक संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों, उद्यमियों, युवाओं और किसानों के बीच सहयोग का एक मजबूत नेटवर्कविकसित करने की आवश्यकता देखते हैं।

उनकी सोच का सार एक सरल सिद्धांत में समाहित है:

“ज्ञान विश्वविद्यालय में जन्म ले सकता है, लेकिन उसकी वास्तविक पहचान तब बनती है जब वह खेत, किसान और समाज के जीवन में बदलाव लाए।”

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दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित: गिरिडीह का आलू बन सकता है निर्यात उत्पाद https://sansargreen.org/dainik-hindustan-giridih-potato-export-rajeev-singh/ Fri, 28 Aug 2026 17:27:47 +0000 https://sansargreen.org/?p=1900 मीडिया कवरेज प्रकाशन: दैनिक हिन्दुस्तान प्रकाशन तिथि: 28 अगस्त 2026 समाचार स्थान: रांची/गिरिडीह विषय: झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030 संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के लिए यह गर्व का अवसर है कि हमारे प्रबंध निदेशक राजीव सिंह द्वारा प्रस्तुत ‘झारखंड कृषि Read More ...

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मीडिया कवरेज

प्रकाशन: दैनिक हिन्दुस्तान
प्रकाशन तिथि: 28 अगस्त 2026
समाचार स्थान: रांची/गिरिडीह
विषय: झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030

संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के लिए यह गर्व का अवसर है कि हमारे प्रबंध निदेशक राजीव सिंह द्वारा प्रस्तुत ‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ और गिरिडीह के आलू को संभावित निर्यात उत्पाद बनाने की पहल को दैनिक हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।

समाचार में रांची स्थित समेति भवन में आयोजित निर्यातोन्मुख क्षमता निर्माण कार्यशाला का उल्लेख किया गया है। यह कार्यशाला राज्य कृषि प्रबंधन एवं प्रसार प्रशिक्षण संस्थान (समेति), झारखंड तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी।

कार्यशाला का शुभारंभ कृषि निदेशक, झारखंड, निदेशक, समेति, राजीव सिंह तथा अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030 की प्रस्तुति

दैनिक हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, संसार ग्रीन मिशन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने कार्यशाला में ‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ प्रस्तुत किया।

इस रोडमैप के अंतर्गत झारखंड के प्रत्येक जिले के प्रमुख कृषि उत्पादों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करने का सुझाव दिया गया। इसमें वैज्ञानिक खेती, बेहतर किस्मों, गुणवत्ता नियंत्रण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, आधुनिक भंडारण, कोल्ड-चेन तथा निर्यात मानकों के अनुरूप पैकेजिंग विकसित करने पर जोर दिया गया।

राजीव सिंह ने बताया कि झारखंड के आलू, हल्दी, सहजन, आम, मिर्च और टमाटर जैसे विशिष्ट उत्पादों में निर्यात तथा मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाएँ हैं।

गिरिडीह के आलू को पायलट परियोजना बनाने का प्रस्ताव

समाचार में गिरिडीह के आलू को विशेष रूप से संभावित निर्यात उत्पाद एवं पायलट परियोजना के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को प्रमुखता दी गई है।

किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से आलू की संगठित खरीद, ग्रेडिंग, भंडारण और विपणन व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ गिरिडीह में कृषि उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

निर्यात मानकों पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

कार्यशाला में एपीडा के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को कृषि निर्यात मानकों, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग तथा आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित जानकारी प्रदान की।

समेति के निदेशक राम शंकर प्रसाद सिंह ने कहा कि इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रम किसान उत्पादक संगठनों को निर्यात प्रक्रिया समझने और प्रतिस्पर्धी बाजार के लिए तैयार होने में सहायता प्रदान करेंगे।

संसार ग्रीन मिशन के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि

दैनिक हिन्दुस्तान में इस पहल का प्रकाशित होना संसार ग्रीन मिशन और उसके प्रबंध निदेशक राजीव सिंह के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है।

यह मीडिया कवरेज झारखंड के कृषि उत्पादों, विशेषकर गिरिडीह के आलू, को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार तक पहुँचाने की संभावनाओं को रेखांकित करता है। संसार ग्रीन मिशन किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, सरकारी संस्थानों और कृषि विशेषज्ञों के सहयोग से राज्य में कृषि निर्यात, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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समाचार पत्र में प्रकाशित: गिरिडीह का आलू बन सकता है निर्यात उत्पाद https://sansargreen.org/media-coverage-giridih-potato-export-rajeev-singh/ Fri, 28 Aug 2026 17:20:21 +0000 https://sansargreen.org/?p=1897 मीडिया कवरेज समाचार पत्र में प्रकाशित: गिरिडीह का आलू बन सकता है निर्यात उत्पाद प्रकाशन तिथि: 28 अगस्त 2026 समाचार स्थान: रांची/गिरिडीह विषय: झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030 संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के लिए यह गर्व का अवसर है कि Read More ...

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मीडिया कवरेज

समाचार पत्र में प्रकाशित: गिरिडीह का आलू बन सकता है निर्यात उत्पाद

प्रकाशन तिथि: 28 अगस्त 2026
समाचार स्थान: रांची/गिरिडीह
विषय: झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030

संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के लिए यह गर्व का अवसर है कि हमारे प्रबंध निदेशक राजीव सिंह द्वारा प्रस्तुत ‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ तथा गिरिडीह के आलू को संभावित निर्यात उत्पाद बनाने की पहल को प्रिंट मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।

प्रकाशित समाचार में रांची स्थित समेति भवन में आयोजित निर्यातोन्मुख क्षमता निर्माण कार्यशाला का उल्लेख किया गया है। यह कार्यशाला राज्य कृषि प्रबंधन एवं प्रसार प्रशिक्षण संस्थान (समेति), झारखंड तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी।

कार्यशाला का शुभारंभ कृषि निदेशक, झारखंड, निदेशक, समेति, राजीव सिंह तथा अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

राजीव सिंह ने प्रस्तुत किया कृषि निर्यात रोडमैप

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संसार ग्रीन मिशन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने कार्यशाला में ‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ प्रस्तुत किया।

इस रोडमैप में झारखंड के प्रत्येक जिले के प्रमुख कृषि उत्पादों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए तैयार करने का सुझाव दिया गया। इसमें वैज्ञानिक खेती, बेहतर किस्मों, गुणवत्ता नियंत्रण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, आधुनिक भंडारण, कोल्ड-चेन तथा निर्यात मानकों के अनुरूप पैकेजिंग विकसित करने पर जोर दिया गया।

राजीव सिंह ने बताया कि झारखंड के आलू, हल्दी, सहजन, आम, मिर्च और टमाटर जैसे विशिष्ट उत्पादों में निर्यात तथा मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाएँ हैं।

गिरिडीह के आलू को पायलट परियोजना बनाने का प्रस्ताव

मीडिया कवरेज में गिरिडीह के आलू को विशेष रूप से संभावित निर्यात उत्पाद एवं पायलट परियोजना के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को प्रमुखता दी गई।

किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से आलू की संगठित खरीद, ग्रेडिंग, भंडारण और विपणन व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ गिरिडीह में कृषि उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

निर्यात मानकों पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

कार्यशाला में एपीडा के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को कृषि निर्यात मानकों, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग तथा आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित जानकारी प्रदान की।

समेति के निदेशक राम शंकर प्रसाद सिंह ने कहा कि इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रम किसान उत्पादक संगठनों को निर्यात प्रक्रिया समझने और प्रतिस्पर्धी बाजार के लिए तैयार होने में सहायता प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं झारखंड के कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा ‘ईश्वर’ ने किसान उत्पादक संगठनों को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन, गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

संसार ग्रीन मिशन के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि

प्रिंट मीडिया में इस पहल का प्रकाशित होना संसार ग्रीन मिशन और उसके प्रबंध निदेशक राजीव सिंह के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है।

यह मीडिया कवरेज झारखंड के कृषि उत्पादों, विशेषकर गिरिडीह के आलू, को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार तक पहुँचाने की संभावनाओं को रेखांकित करता है। संसार ग्रीन मिशन किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, सरकारी संस्थानों और कृषि विशेषज्ञों के सहयोग से राज्य में कृषि निर्यात, मूल्य संवर्धन तथा ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030: किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की हमारी पहल https://sansargreen.org/rajeev-singh-jharkhand-agriculture-export-roadmap-2030/ Fri, 28 Aug 2026 17:04:09 +0000 https://sansargreen.org/?p=1893 संसार ग्रीन मिशन के प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत की कृषि निर्यात की व्यावहारिक कार्ययोजना झारखंड के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल Read More ...

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संसार ग्रीन मिशन के प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत की कृषि निर्यात की व्यावहारिक कार्ययोजना

झारखंड के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के रूप में कृषि निर्यात कार्यशाला आयोजित की गई। समेति तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की सहभागिता से आयोजित इस कार्यशाला में कृषि अधिकारियों, विशेषज्ञों और राज्य के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का उद्घाटन कृषि निदेशक, झारखंड, निदेशक, समेति झारखंड और संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजीव सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को कृषि निर्यात की संभावनाओं, गुणवत्ता मानकों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, प्रमाणीकरण तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराना था।

राजीव सिंह ने प्रस्तुत किया कृषि निर्यात रोडमैप

कार्यशाला के दौरान राजीव सिंह ने झारखंड के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष ‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ प्रस्तुत किया।

इस रोडमैप में राज्य के विशिष्ट कृषि उत्पादों की जिलावार पहचान करने और उन्हें राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की व्यावहारिक रणनीति साझा की गई। प्रस्तुतीकरण में उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और विपणन तक की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत बनाने पर बल दिया गया।

राजीव सिंह ने कहा कि झारखंड के पास विविध कृषि एवं वन उत्पादों का समृद्ध आधार है। उचित योजना, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार संपर्क विकसित करके इन उत्पादों को देश-विदेश के खरीदारों तक पहुँचाया जा सकता है।

झारखंड के उत्पादों में व्यापक निर्यात क्षमता

झारखंड में आलू, इमली, महुआ, आम, कटहल, हल्दी, मिर्च, टमाटर और कई अन्य पारंपरिक कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं निर्यात की व्यापक संभावनाएँ हैं।

इन संभावनाओं को वास्तविक आर्थिक अवसर में बदलने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उत्पादों की गुणवत्ता में निरंतरता, मानकीकरण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और समयबद्ध आपूर्ति भी सुनिश्चित करनी होगी।

झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030 में निम्नलिखित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया:

  • प्रत्येक जिले के निर्यात योग्य कृषि उत्पादों की पहचान
  • गुणवत्ता परीक्षण, प्रमाणीकरण और उत्पाद की पता लगाने योग्य पहचान
  • उपज का वैज्ञानिक संग्रह, ग्रेडिंग और प्रसंस्करण
  • निर्यात मानकों के अनुरूप आधुनिक पैकेजिंग
  • शीत शृंखला और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं का विकास
  • किसान उत्पादक संगठनों के लिए प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा बाजार संपर्क
  • डिजिटल माध्यम से मांग, मूल्य और बाजार संबंधी जानकारी

किसान उत्पादक संगठनों की केंद्रीय भूमिका

संसार ग्रीन मिशन का मानना है कि झारखंड के कृषि निर्यात को बढ़ाने में किसान उत्पादक संगठन केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं।

राज्य के अधिकांश किसान छोटे एवं सीमांत वर्ग से आते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर उनके लिए पर्याप्त मात्रा में एकसमान गुणवत्ता वाली उपज तैयार करना, उसका प्रसंस्करण करना और बड़े खरीदारों तक पहुँचना कठिन होता है।

किसान उत्पादक संगठन किसानों को संगठित कर उपज का सामूहिक संग्रह, गुणवत्ता परीक्षण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन सुनिश्चित कर सकते हैं। इससे किसानों की सौदेबाजी क्षमता मजबूत होगी, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

Rajeev Singh, Managing Director of Sansar Green Mission, presents the Jharkhand Agriculture Export Roadmap 2030 to Farmer Producer Organisation representatives at an agriculture workshop in Ranchi.
Sansar Green Mission Managing Director Rajeev Singh presents a roadmap to connect farmers and agricultural products from Giridih and across Jharkhand with national and international markets.

एपीडा और समेति का मार्गदर्शन महत्त्वपूर्ण

कृषि निर्यात की प्रक्रिया में गुणवत्ता प्रमाणीकरण, खाद्य सुरक्षा मानकों, पैकेजिंग, दस्तावेजीकरण और विदेशी बाजारों की आवश्यकताओं को समझना आवश्यक है।

एपीडा का संस्थागत मार्गदर्शन किसान उत्पादक संगठनों और कृषि उद्यमियों को निर्यात प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों, प्रमाणीकरण, पैकेजिंग और संभावित विदेशी बाजारों की जानकारी उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

समेति के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम किसानों, कृषि अधिकारियों और किसान उत्पादक संगठनों को निर्यातोन्मुख कृषि के लिए तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।

डिजिटल तकनीक से मजबूत होगा बाजार संपर्क

संसार ग्रीन मिशन कृषि निर्यात में डिजिटल तकनीक और बाजार सूचना प्रणाली को भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानता है।

डिजिटल मंचों के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों को देश-विदेश के खरीदारों, संस्थागत बाजारों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों से जोड़ा जा सकता है। किसानों को बाजार की मांग, प्रचलित मूल्य, गुणवत्ता आवश्यकताओं और आपूर्ति संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सकती है।

प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली उत्पाद की पहचान, गुणवत्ता निगरानी और आपूर्ति शृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी सहायक हो सकती है।

किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य

‘झारखंड कृषि निर्यात रोडमैप–2030’ का उद्देश्य राज्य के किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को संगठित कर झारखंड के विशिष्ट कृषि उत्पादों को विश्वसनीय पहचान दिलाना है।

बेहतर उत्पादन पद्धतियों, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, आधुनिक पैकेजिंग, मजबूत भंडारण व्यवस्था और प्रभावी बाजार संपर्क के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। इससे राज्य में कृषि उद्यमिता, निवेश, प्रसंस्करण इकाइयों और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

कृषि निदेशक एवं निदेशक, समेति के साथ कार्यशाला का उद्घाटन करना तथा झारखंड के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों के समक्ष रोडमैप प्रस्तुत करना संसार ग्रीन मिशन और उसके प्रबंध निदेशक राजीव सिंह के लिए एक गौरवपूर्ण एवं अविस्मरणीय अवसर रहा।

संसार ग्रीन मिशन भविष्य में भी किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, शोध संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर झारखंड के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार तक पहुँचाने की दिशा में कार्य करता रहेगा।

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