Farmer Empowerment Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/farmer-empowerment/ (प्रयोगशाला से खेत तक, ज्ञान से समृद्धि तक) Fri, 02 Oct 2026 15:39:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.4 https://sansargreen.org/wp-content/uploads/2026/10/Logo-Sansar-Green-Small.png Farmer Empowerment Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/farmer-empowerment/ 32 32 गिरिडीह के TEJAS कार्यक्रम में राजीव सिंह ने युवाओं को दिया उद्यमिता का संदेश https://sansargreen.org/rajeev-singh-tejas-giridih-2026-hindi/ Thu, 01 Oct 2026 04:56:16 +0000 https://sansargreen.org/?p=1958 संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने साझा किए स्टार्टअप, कृषि नवाचार और स्थानीय अवसरों से व्यवसाय खड़ा करने के अनुभव गिरिडीह, 29 सितंबर 2026। गिरिडीह जिला समाहरणालय में आयोजित TEJAS कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध Read More ...

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संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने साझा किए स्टार्टअप, कृषि नवाचार और स्थानीय अवसरों से व्यवसाय खड़ा करने के अनुभव

गिरिडीह, 29 सितंबर 2026। गिरिडीह जिला समाहरणालय में आयोजित TEJAS कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं, उद्यमियों, विद्यार्थियों और स्टार्टअप संस्थापकों को संबोधित करते हुए स्थानीय समस्याओं के समाधान, तकनीक के उपयोग और बाजार की समझ के आधार पर व्यवसाय विकसित करने के व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

“छोटे शहर से शुरुआत हो सकती है, लेकिन सपनों की सीमा छोटी नहीं होनी चाहिए।”

इस संदेश के साथ श्री सिंह ने युवाओं को अपने क्षेत्र की संभावनाएँ पहचानने और छोटे, ठोस कदमों से उद्यमिता की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में उपायुक्त, गिरिडीह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही उप विकास आयुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उद्योग विभाग के महाप्रबंधक, डीपीआईआईटी के प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, व्यवसायी और युवा उद्यमी भी शामिल हुए।

संसार ग्रीन की यात्रा से साझा की उद्यमिता की सीख

श्री राजीव सिंह ने संसार ग्रीन की उद्यमिता यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उपयोगी व्यवसाय की शुरुआत लोगों की वास्तविक जरूरत को समझने से होती है। किसी समस्या का ऐसा समाधान तैयार करना, जिसे लोग आसानी से अपना सकें और जिस पर भरोसा कर सकें, व्यवसाय की मजबूत नींव बनाता है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि किसानों तक समय पर सही सलाह पहुँचाना, गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना और स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार से जोड़ना उद्यमिता के महत्वपूर्ण अवसर हो सकते हैं।

उनके अनुसार, उद्यमी के लिए ग्राहकों से संवाद करना, उनकी कठिनाइयों को समझना और प्रतिक्रिया के आधार पर अपने उत्पाद या सेवा में सुधार करना आवश्यक है।

विचार को व्यवसाय में बदलने के लिए व्यावहारिक कदम जरूरी

अपने संबोधन में श्री सिंह ने स्टार्टअप विकास, नवाचार, व्यवसाय करने में सुगमता, डिजिटल कॉमर्स, तकनीक अपनाने और बाजार से जुड़ाव जैसे विषयों पर विचार रखे।

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि किसी विचार पर बड़े स्तर पर निवेश करने से पहले उसकी उपयोगिता और मांग को परखें। इसके लिए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण कदम बताए:

  • संभावित ग्राहकों से बात करके उनकी जरूरत समझें।
  • छोटे स्तर पर अपने उत्पाद या सेवा का परीक्षण करें।
  • लागत, मूल्य निर्धारण और बाजार की मांग का आकलन करें।
  • भरोसेमंद टीम तैयार करें और ग्राहकों से किए वादे पूरे करें।
  • अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर लगातार सुधार करें।

श्री सिंह ने कहा कि पहला सफल परीक्षण, पहला संतुष्ट ग्राहक और पहला दोबारा मिला ऑर्डर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। इनसे उद्यमी को अपने व्यवसाय की दिशा समझने और आगे के निर्णय लेने में मदद मिलती है।

गिरिडीह और झारखंड में उद्यमिता की संभावनाएँ

श्री राजीव सिंह ने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों, विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं और ग्रामीण उद्योगों में गिरिडीह तथा झारखंड की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने बताया कि स्थानीय उद्यमी अपने क्षेत्र के संसाधनों, जरूरतों और चुनौतियों को करीब से जानते हैं। यह समझ व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण ताकत बन सकती है। इसे तकनीक, गुणवत्ता और बाजार तक पहुँच से जोड़कर ऐसे उद्यम विकसित किए जा सकते हैं जो व्यापक स्तर पर ग्राहकों को सेवाएँ दें।

स्थानीय उत्पाद की बेहतर पैकेजिंग, उपयोगी डिजिटल सेवा या कृषि से जुड़ी किसी आपूर्ति समस्या का समाधान भी एक नए व्यवसाय का आधार बन सकता है। जरूरी है कि समाधान व्यावहारिक हो और ग्राहकों तक विश्वसनीय ढंग से पहुँचाया जा सके।

Rajeev Singh, Founder and Managing Director of Sansar Green, speaking behind a flower-decorated podium with TEJAS signage.
गिरिडीह जिला समाहरणालय में 29 सितंबर 2026 को आयोजित TEJAS कार्यक्रम में युवाओं और उद्यमियों को संबोधित करते संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह। उन्होंने स्थानीय संभावनाओं, कृषि नवाचार और तकनीक के माध्यम से व्यवसाय तथा रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर अपने अनुभव साझा किए।

कृषि, तकनीक और बाजार को जोड़ने की आवश्यकता

संबोधन के दौरान श्री सिंह ने कृषि क्षेत्र में समय पर मार्गदर्शन, विश्वसनीय कृषि सामग्री और मजबूत बाजार संपर्क के महत्व पर जोर दिया।

ये विषय संसार ग्रीन के ‘मिट्टी से मंडी तक’ दृष्टिकोण से भी जुड़े हैं। इस दृष्टिकोण में मिट्टी के स्वास्थ्य, कृषि सामग्री, किसान मार्गदर्शन और बाजार के अवसरों को परस्पर जोड़कर देखा जाता है।

उन्होंने युवाओं को कृषि की पूरी प्रक्रिया में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। खेती से लेकर प्रसंस्करण, पैकिंग और बिक्री तक विभिन्न चरणों में उपयोगी सेवाएँ विकसित की जा सकती हैं।

तकनीक का चयन भी जरूरत के अनुसार होना चाहिए, ताकि वह लोगों का समय बचाए, लागत कम करने में मदद करे या काम को अधिक सुविधाजनक बनाए।

व्यवसाय की प्रगति के साथ दूसरों के लिए भी बनें अवसर

श्री सिंह के संबोधन का एक प्रमुख संदेश था कि उद्यमिता से दूसरों के लिए भी आगे बढ़ने के अवसर पैदा होने चाहिए।

एक विकसित होता व्यवसाय कर्मचारियों, किसानों, आपूर्तिकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं और स्थानीय साझेदारों को काम तथा आय के अवसर दे सकता है। उन्होंने युवाओं को अपने विचारों के आर्थिक पक्ष के साथ उनके सामाजिक योगदान पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

संसार ग्रीन के लिए कृषि, नवाचार और तकनीक को लोगों की आजीविका से जोड़ना उसके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी उपयोगी समाधानों और दीर्घकालिक संबंधों के माध्यम से किसानों, युवाओं तथा ग्रामीण समुदायों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

मार्गदर्शन और सहयोग से मजबूत होगा उद्यमिता का वातावरण

TEJAS कार्यक्रम ने प्रशासन, उद्योग, शिक्षा और स्टार्टअप समुदाय के बीच संवाद का अवसर प्रदान किया।

श्री राजीव सिंह ने निरंतर सीखने, अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन लेने और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। ऐसे संपर्क उभरते उद्यमियों को अपने विचारों का परीक्षण करने, जरूरी जानकारी प्राप्त करने और व्यवसाय की अगली दिशा तय करने में मदद कर सकते हैं।

संसार ग्रीन ने कार्यक्रम में आमंत्रण और विचार साझा करने का अवसर देने के लिए जिला प्रशासन, डीपीआईआईटी के प्रतिनिधियों, उद्योग विभाग तथा सभी आयोजकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

युवाओं के लिए श्री सिंह का संदेश स्पष्ट था—किसी वास्तविक जरूरत को पहचानें, एक उपयोगी समाधान से शुरुआत करें और अनुभव के साथ अपनी क्षमता बढ़ाएँ। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ व्यवसाय भी देशभर में अपनी पहचान बना सकता है।

संसार ग्रीन के बारे में

संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड झारखंड का डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त एग्रीटेक स्टार्टअप है। कंपनी का मुख्यालय रांची में है और गिरिडीह में इसकी गतिविधियाँ संचालित होती हैं।

संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह के नेतृत्व में कंपनी जैविक कृषि सामग्री, मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्मजीव आधारित समाधान, किसान सहयोग और कृषि नवाचार के क्षेत्र में कार्य करती है। अपने ‘मिट्टी से मंडी तक’ दृष्टिकोण के माध्यम से संसार ग्रीन कृषि ज्ञान, उपयोगी उत्पादों और बाजार के अवसरों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

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प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन सूखे पत्तों से तैयार करेंगे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद https://sansargreen.org/prabhat-khabar-iit-ism-dhanbad-sansar-green-organic-manure-2/ Sat, 19 Sep 2026 11:54:49 +0000 https://sansargreen.org/?p=1933 16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रभात खबर ने IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल को प्रमुखता से दी जगह; किसानों, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती को मिलेगा लाभ धनबाद | 16 सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद Read More ...

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16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रभात खबर ने IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल को प्रमुखता से दी जगह; किसानों, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती को मिलेगा लाभ

धनबाद | 16 सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड की सूखे पत्तों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की पहल को प्रमुख हिंदी समाचार पत्र प्रभात खबर ने अपने धनबाद संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

16 सितंबर 2026 को प्रकाशित खबर में प्रभात खबर ने “आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा” शीर्षक के साथ इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कचरा प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती से जोड़कर प्रस्तुत किया है।

सूखे पत्तों को जलाने के बजाय बनेगी उपयोगी जैविक खाद

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर परिसर में पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की तैयारी कर रहा है।

इस पहल का उद्देश्य सूखी पत्तियों को जलाने या कचरे में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपयोग कर मिट्टी की सेहत सुधारना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।

प्रस्तावित परियोजना के तहत कैंपस और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाली सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से विघटित किया जाएगा। इसके बाद उनमें आवश्यक जैविक पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव मिलाकर गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार करने की योजना है।

इस प्रक्रिया को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व → लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → बेहतर मृदा स्वास्थ्य

IIT (ISM), संसार ग्रीन और जिला कृषि विभाग की सहभागिता

प्रभात खबर ने अपनी रिपोर्ट में इस पहल से जुड़े प्रमुख लोगों और संस्थाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया है।

परियोजना पर हुई चर्चा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक कुमार दास, संसार ग्रीन के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

प्रभात खबर की रिपोर्ट में इस परियोजना को IIT (ISM), संसार ग्रीन और धनबाद के जिला कृषि विभाग के साझा प्रयास से आगे बढ़ाए जाने का उल्लेख किया गया है।

कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना

इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि तैयार जैविक खाद का उपयोग केवल संस्थान के भीतर सीमित रखने की योजना नहीं है।

प्रभात खबर के अनुसार, तैयार खाद का उपयोग संस्थान के उद्यान, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मिट्टी के पुनरुद्धार में किया जा सकेगा।

इसके साथ ही इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है। इस तरह सूखी पत्तियों के प्रबंधन से शुरू होने वाली पहल का लाभ कृषि और मृदा स्वास्थ्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर विशेष ध्यान

संसार ग्रीन की प्रस्तावित प्रक्रिया सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित नहीं है। इसमें वैज्ञानिक रूप से विघटित जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों के साथ लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की परिकल्पना की गई है।

इसका उद्देश्य ऐसा मूल्यवर्धित जैविक उत्पाद तैयार करना है जो मिट्टी में जैविक पदार्थ की उपलब्धता बढ़ाने के साथ मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं को भी सहयोग दे सके।

संसार ग्रीन मृदा स्वास्थ्य, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, जैविक कृषि और जैव-आधारित कृषि समाधानों पर काम कर रहा है। इसलिए यह परियोजना कंपनी के मौजूदा कार्यक्षेत्र को sustainable green-waste management के साथ जोड़ती है।

बड़े संस्थानों के लिए भी बन सकता है मॉडल

प्रभात खबर की रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास के हवाले से सूखी पत्तियों को कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का महत्वपूर्ण स्रोत बताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संस्थान ऐसा मॉडल तैयार करना चाहता है जिसे भविष्य में विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, उद्योगों, हाउसिंग सोसायटियों और नगर निकायों द्वारा भी अपनाया जा सके।

इस दृष्टिकोण से परियोजना का महत्व IIT (ISM) धनबाद परिसर में उत्पन्न सूखी पत्तियों के प्रबंधन से आगे जाता है। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह बड़े परिसरों में उत्पन्न होने वाले green waste के स्थानीय और उपयोगी प्रबंधन का एक उदाहरण बन सकता है।

प्रभात खबर ने किसानों से जुड़े पहलू को किया प्रमुखता से रेखांकित

इस खबर की खास बात यह है कि प्रभात खबर ने परियोजना के पर्यावरणीय पक्ष के साथ किसानों को होने वाले संभावित लाभ को भी अपने मुख्य शीर्षक में स्थान दिया है।

“आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा”—यह शीर्षक परियोजना के Waste-to-Wealth मॉडल के साथ उसके कृषि उपयोग को भी सामने लाता है।

संसार ग्रीन के लिए इस पहल का उद्देश्य भी केवल सूखी पत्तियों का निस्तारण नहीं, बल्कि उनसे ऐसा उपयोगी जैविक संसाधन तैयार करना है जिसे मृदा स्वास्थ्य, पौधरोपण, नर्सरी और जैविक कृषि से जोड़ा जा सके।

Waste to Wealth से मिट्टी की सेहत तक

इस पहल के केंद्र में एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण विचार है—सूखी पत्तियां कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का एक उपयोगी स्रोत हैं।

उन्हें जलाने या फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से संसाधित करके मिट्टी तक वापस पहुंचाया जा सकता है।

सूखी पत्तियां → जैविक संसाधन → पोषक एवं माइक्रोबियल संवर्धन → समृद्ध जैविक खाद → स्वस्थ मिट्टी

प्रभात खबर जैसे प्रमुख समाचार पत्र द्वारा इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और जैविक कृषि से जुड़े इस विषय को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण है।

संसार ग्रीन का प्रयास विज्ञान, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक कार्यान्वयन को जोड़ते हुए ऐसे समाधान विकसित करना है, जिनसे जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और उन्हें पुनः मिट्टी के प्राकृतिक चक्र में लौटाया जा सके।

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राष्ट्रीय मंच पर Sansar Green की मजबूत उपस्थिति: PM-RKVY कार्यक्रम में राजीव सिंह ने प्रस्तुत किया “Soil to Bazaar” विज़न https://sansargreen.org/rajeev-singh-sansar-green-soil-to-bazaar-pm-rkvy-national-agri-startup-program/ Fri, 24 Jul 2026 08:22:14 +0000 https://sansargreen.org/?p=1881 24 जुलाई 2026 भारतीय कृषि में तकनीक आधारित परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहे Sansar Green ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब इसके संस्थापक राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत आयोजित National Agri Startup Investment & Evaluation Program में झारखंड का प्रतिनिधित्व Read More ...

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24 जुलाई 2026

भारतीय कृषि में तकनीक आधारित परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहे Sansar Green ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब इसके संस्थापक राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत आयोजित National Agri Startup Investment & Evaluation Program में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (CCS-NIAM), जयपुर में आयोजित हुआ, जहाँ देशभर के चयनित कृषि स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के दौरान राजीव सिंह ने Sansar Green का “Soil to Bazaar” विज़न प्रस्तुत किया। यह केवल एक कृषि मॉडल नहीं, बल्कि किसानों के लिए मिट्टी से बाजार तक एकीकृत सेवाओं पर आधारित आधुनिक कृषि प्रणाली है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक खेती, डिजिटल तकनीकों और बेहतर बाजार संपर्क के माध्यम से किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि करना है।

एकीकृत कृषि समाधान की अवधारणा

“Soil to Bazaar” मॉडल किसानों की पूरी कृषि यात्रा को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसमें शामिल हैं—

  • वैज्ञानिक Soil Testing एवं पोषक तत्व प्रबंधन
  • AI आधारित कृषि सलाह और निर्णय सहायता
  • जैविक एवं सूक्ष्मजीवी कृषि इनपुट
  • गुणवत्तापूर्ण बीज एवं पौध सामग्री
  • किसान प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन
  • डिजिटल कृषि सेवाएँ और ई-कॉमर्स समाधान
  • किसानों को सीधे बाजार एवं खरीदारों से जोड़ने की व्यवस्था

इस मॉडल का उद्देश्य खेती को अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-संचालित बनाना है।

राष्ट्रीय मंच पर नवाचार की प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों और मूल्यांकन समिति के सदस्यों के साथ इस मॉडल पर विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर ने कृषि क्षेत्र में उभरते नवाचारों को साझा करने तथा विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

किसानों के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण

राजीव सिंह ने कहा कि Sansar Green का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादों का विकास करना नहीं, बल्कि किसानों के लिए ऐसा समग्र कृषि इकोसिस्टम तैयार करना है, जहाँ विज्ञान, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैविक तकनीक और बाजार एक साथ मिलकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकें।

उन्होंने कहा कि “Soil to Bazaar” की अवधारणा खेत की मिट्टी के वैज्ञानिक विश्लेषण से शुरू होकर फसल उत्पादन, गुणवत्ता सुधार, डिजिटल मार्गदर्शन, जैविक एवं माइक्रोबियल समाधान और बाजार तक पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करती है।

झारखंड से राष्ट्रीय स्तर तक

इस कार्यक्रम में भागीदारी झारखंड में विकसित कृषि नवाचारों की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है। यह इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक-आधारित समाधान अब राष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपयोगिता और संभावनाओं के साथ प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

Sansar Green भविष्य में भी अनुसंधान, नवाचार, AI, जैविक कृषि, सूक्ष्मजीवी प्रौद्योगिकी और डिजिटल समाधानों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने तथा भारत में आधुनिक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित कृषि व्यवस्था के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

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मीडिया में Sansar Green के “Soil to Bazaar” विज़न को मिली राष्ट्रीय पहचान https://sansargreen.org/rajeev-singh-sansar-green-soil-to-bazaar-national-media-recognition/ Fri, 24 Jul 2026 08:17:55 +0000 https://sansargreen.org/?p=1878 📰 मीडिया में Sansar Green के “Soil to Bazaar” विज़न को मिली राष्ट्रीय पहचान यह साझा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि राष्ट्रीय मीडिया ने Sansar Green के “Soil to Bazaar” कृषि मॉडल और मेरी राष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुति को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। हाल Read More ...

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📰 मीडिया में Sansar Green के “Soil to Bazaar” विज़न को मिली राष्ट्रीय पहचान

यह साझा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि राष्ट्रीय मीडिया ने Sansar Green के “Soil to Bazaar” कृषि मॉडल और मेरी राष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुति को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

हाल ही में मुझे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (CCS-NIAM), जयपुर में आयोजित National Agri Startup Investment & Evaluation Program में झारखंड का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।

इस मंच पर मैंने Sansar Green का “Soil to Bazaar” विज़न प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य किसानों को मिट्टी से बाजार (Soil to Bazaar)तक एकीकृत एवं वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराना है। इस मॉडल में Soil Testing, AI आधारित कृषि परामर्श, जैविक एवं सूक्ष्मजीवी कृषि इनपुट, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, किसान प्रशिक्षण, डिजिटल कृषि सेवाएँ तथा किसानों को बाजार से जोड़ने की समग्र व्यवस्था शामिल है।

इस प्रस्तुति के दौरान कृषि विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों एवं राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति के साथ सार्थक चर्चा हुई। इस प्रकार की राष्ट्रीय पहचान हमें कृषि क्षेत्र में नवाचार आधारित समाधान विकसित करने के लिए और अधिक प्रेरित करती है।

यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि Sansar Green के उस मिशन की पहचान है, जिसके माध्यम से हम विज्ञान, तकनीक और नवाचार को किसानों तक पहुँचाकर भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

मैं इस अवसर पर सभी विशेषज्ञों, मार्गदर्शकों, आयोजकों, सहयोगियों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

हमारा संकल्प स्पष्ट है—”Science for Farmers. Innovation for Agriculture. Sustainability for India.” 🌱🇮🇳

#RajeevSingh #SansarGreen #SoilToBazaar #PMRKVY #CCSNIAM #AgriStartup #AgricultureInnovation #AIinAgriculture #FarmerFirst #SustainableAgriculture #Jharkhand #StartupIndia #IndianAgriculture

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दैनिक हिन्दुस्तान में Sansar Green के “Soil to Bazaar” मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान https://sansargreen.org/daily-hindustan-rajeev-singh-sansar-green-soil-to-bazaar-national-recognition/ Wed, 20 May 2026 06:13:00 +0000 https://sansargreen.org/?p=1 24 जुलाई 2026 झारखंड के युवा कृषि उद्यमी एवं Sansar Green के संस्थापक राजीव सिंह के नवाचार “Soil to Bazaar” मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक दैनिक हिन्दुस्तान ने अपने समाचार में इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिससे झारखंड के Read More ...

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24 जुलाई 2026

झारखंड के युवा कृषि उद्यमी एवं Sansar Green के संस्थापक राजीव सिंह के नवाचार “Soil to Bazaar” मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक दैनिक हिन्दुस्तान ने अपने समाचार में इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिससे झारखंड के कृषि नवाचार को देशभर में नई पहचान प्राप्त हुई।

यह उपलब्धि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत आयोजित National Agri Startup Investment and Evaluation Program के दौरान हासिल हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (CCS-NIAM), जयपुर द्वारा किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से चयनित एग्री-स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में राजीव सिंह ने झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए Sansar Green के “Soil to Bazaar” मॉडल की अवधारणा प्रस्तुत की। यह मॉडल किसानों को मिट्टी की जांच से लेकर बाजार तक एकीकृत सेवाएँ उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इसमें वैज्ञानिक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सलाह, जैविक एवं सूक्ष्मजीवी कृषि इनपुट, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, किसान प्रशिक्षण, डिजिटल समाधान और बाजार से सीधा जुड़ाव जैसी सुविधाओं को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है।

इस मॉडल का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की लागत कम करना, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना, आधुनिक तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना तथा किसानों की आय और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि करना है।

दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित समाचार के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत इस नवाचार को कृषि विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों एवं मूल्यांकन समिति के सदस्यों ने सराहनीय पहल माना। विशेषज्ञों ने इसे तकनीक आधारित, टिकाऊ और किसान-केंद्रित कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान Sansar Green की नवाचार-प्रधान कार्यशैली और कृषि क्षेत्र में उसके दीर्घकालिक दृष्टिकोण को और मजबूत बनाती है। यह उपलब्धि इस बात का भी संकेत है कि झारखंड से विकसित कृषि समाधान अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

इस अवसर पर राजीव सिंह ने कहा कि Sansar Green का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादों का निर्माण करना नहीं, बल्कि किसानों के लिए ऐसा समग्र कृषि इकोसिस्टम तैयार करना है, जहाँ विज्ञान, तकनीक, नवाचार और बाजार एक साथ मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दें। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों, विशेषज्ञों, मार्गदर्शकों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी Sansar Green किसानों के हित में नवाचार आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

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