16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रभात खबर ने IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल को प्रमुखता से दी जगह; किसानों, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती को मिलेगा लाभ
धनबाद | 16 सितंबर 2026
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड की सूखे पत्तों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की पहल को प्रमुख हिंदी समाचार पत्र प्रभात खबर ने अपने धनबाद संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
16 सितंबर 2026 को प्रकाशित खबर में प्रभात खबर ने “आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा” शीर्षक के साथ इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कचरा प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती से जोड़कर प्रस्तुत किया है।
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सूखे पत्तों को जलाने के बजाय बनेगी उपयोगी जैविक खाद
प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर परिसर में पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की तैयारी कर रहा है।
इस पहल का उद्देश्य सूखी पत्तियों को जलाने या कचरे में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपयोग कर मिट्टी की सेहत सुधारना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।
प्रस्तावित परियोजना के तहत कैंपस और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाली सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से विघटित किया जाएगा। इसके बाद उनमें आवश्यक जैविक पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव मिलाकर गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार करने की योजना है।
इस प्रक्रिया को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है:
सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व → लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → बेहतर मृदा स्वास्थ्य
IIT (ISM), संसार ग्रीन और जिला कृषि विभाग की सहभागिता
प्रभात खबर ने अपनी रिपोर्ट में इस पहल से जुड़े प्रमुख लोगों और संस्थाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया है।
परियोजना पर हुई चर्चा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक कुमार दास, संसार ग्रीन के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।
प्रभात खबर की रिपोर्ट में इस परियोजना को IIT (ISM), संसार ग्रीन और धनबाद के जिला कृषि विभाग के साझा प्रयास से आगे बढ़ाए जाने का उल्लेख किया गया है।
कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि तैयार जैविक खाद का उपयोग केवल संस्थान के भीतर सीमित रखने की योजना नहीं है।
प्रभात खबर के अनुसार, तैयार खाद का उपयोग संस्थान के उद्यान, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मिट्टी के पुनरुद्धार में किया जा सकेगा।
इसके साथ ही इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है। इस तरह सूखी पत्तियों के प्रबंधन से शुरू होने वाली पहल का लाभ कृषि और मृदा स्वास्थ्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर विशेष ध्यान
संसार ग्रीन की प्रस्तावित प्रक्रिया सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित नहीं है। इसमें वैज्ञानिक रूप से विघटित जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों के साथ लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की परिकल्पना की गई है।
इसका उद्देश्य ऐसा मूल्यवर्धित जैविक उत्पाद तैयार करना है जो मिट्टी में जैविक पदार्थ की उपलब्धता बढ़ाने के साथ मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं को भी सहयोग दे सके।
संसार ग्रीन मृदा स्वास्थ्य, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, जैविक कृषि और जैव-आधारित कृषि समाधानों पर काम कर रहा है। इसलिए यह परियोजना कंपनी के मौजूदा कार्यक्षेत्र को sustainable green-waste management के साथ जोड़ती है।
बड़े संस्थानों के लिए भी बन सकता है मॉडल
प्रभात खबर की रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास के हवाले से सूखी पत्तियों को कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का महत्वपूर्ण स्रोत बताया गया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संस्थान ऐसा मॉडल तैयार करना चाहता है जिसे भविष्य में विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, उद्योगों, हाउसिंग सोसायटियों और नगर निकायों द्वारा भी अपनाया जा सके।
इस दृष्टिकोण से परियोजना का महत्व IIT (ISM) धनबाद परिसर में उत्पन्न सूखी पत्तियों के प्रबंधन से आगे जाता है। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह बड़े परिसरों में उत्पन्न होने वाले green waste के स्थानीय और उपयोगी प्रबंधन का एक उदाहरण बन सकता है।
प्रभात खबर ने किसानों से जुड़े पहलू को किया प्रमुखता से रेखांकित
इस खबर की खास बात यह है कि प्रभात खबर ने परियोजना के पर्यावरणीय पक्ष के साथ किसानों को होने वाले संभावित लाभ को भी अपने मुख्य शीर्षक में स्थान दिया है।
“आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा”—यह शीर्षक परियोजना के Waste-to-Wealth मॉडल के साथ उसके कृषि उपयोग को भी सामने लाता है।
संसार ग्रीन के लिए इस पहल का उद्देश्य भी केवल सूखी पत्तियों का निस्तारण नहीं, बल्कि उनसे ऐसा उपयोगी जैविक संसाधन तैयार करना है जिसे मृदा स्वास्थ्य, पौधरोपण, नर्सरी और जैविक कृषि से जोड़ा जा सके।
Waste to Wealth से मिट्टी की सेहत तक
इस पहल के केंद्र में एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण विचार है—सूखी पत्तियां कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का एक उपयोगी स्रोत हैं।
उन्हें जलाने या फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से संसाधित करके मिट्टी तक वापस पहुंचाया जा सकता है।
सूखी पत्तियां → जैविक संसाधन → पोषक एवं माइक्रोबियल संवर्धन → समृद्ध जैविक खाद → स्वस्थ मिट्टी
प्रभात खबर जैसे प्रमुख समाचार पत्र द्वारा इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और जैविक कृषि से जुड़े इस विषय को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण है।
संसार ग्रीन का प्रयास विज्ञान, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक कार्यान्वयन को जोड़ते हुए ऐसे समाधान विकसित करना है, जिनसे जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और उन्हें पुनः मिट्टी के प्राकृतिक चक्र में लौटाया जा सके।
