Soil Restoration Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/soil-restoration/ (प्रयोगशाला से खेत तक, ज्ञान से समृद्धि तक) Fri, 02 Oct 2026 15:41:29 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.4 https://sansargreen.org/wp-content/uploads/2026/10/Logo-Sansar-Green-Small.png Soil Restoration Archives - Sansar Green https://sansargreen.org/tag/soil-restoration/ 32 32 IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन मिलकर सूखे पत्तों से बनाएंगे पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद https://sansargreen.org/iit-ism-%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2/ Sat, 19 Sep 2026 06:57:26 +0000 https://sansargreen.org/?p=1922 सूखी पत्तियों को कचरे में फेंकने या जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने की पहल; लाभकारी सूक्ष्मजीवों और आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध कर तैयार की जाएगी जैविक खाद धनबाद | सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान Read More ...

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सूखी पत्तियों को कचरे में फेंकने या जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने की पहल; लाभकारी सूक्ष्मजीवों और आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध कर तैयार की जाएगी जैविक खाद

धनबाद | सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड मिलकर परिसर में पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियों को उपयोगी जैविक खाद में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रस्तावित परियोजना के तहत सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से अपघटित कर उनमें आवश्यक पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव मिलाकर पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद तैयार की जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य सूखी पत्तियों को केवल कचरा मानकर नष्ट करने के बजाय उन्हें दोबारा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन में बदलना है। इससे हरित कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक व्यावहारिक मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

IIT (ISM) धनबाद में परियोजना पर हुई चर्चा

परियोजना को लेकर आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में हुई रणनीतिक चर्चा में डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक कुमार दास, संसार ग्रीन के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

बैठक में सूखी पत्तियों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उत्पादन प्रक्रिया, आवश्यक संसाधनों, माइक्रोबियल एनरिचमेंट, तैयार जैविक खाद के उपयोग और परियोजना को व्यावहारिक रूप से लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

[यहां सोफे पर बैठकर चर्चा वाली तस्वीर लगाएं]

सूखी पत्तियों को वापस मिट्टी तक पहुंचाने का प्रयास

पेड़ों से गिरने वाली पत्तियां प्राकृतिक रूप से जैविक पदार्थ का स्रोत होती हैं। लेकिन बड़ी मात्रा में जमा होने पर इनके प्रबंधन की समस्या उत्पन्न होती है। पत्तियों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जबकि उन्हें सामान्य कचरे के साथ फेंक देने पर उनमें मौजूद जैविक पदार्थ का उपयोग नहीं हो पाता।

इसी समस्या को अवसर में बदलते हुए प्रस्तावित परियोजना में सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से डीकंपोज किया जाएगा। इसके बाद तैयार जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध कर मूल्यवर्धित जैविक खाद के रूप में विकसित करने की योजना है।

प्रस्तावित प्रक्रिया:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्वों का संवर्धन → लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → मिट्टी में पुनः उपयोग

मृदा स्वास्थ्य और माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान

संसार ग्रीन इस पहल को केवल सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित रखने के बजाय मृदा स्वास्थ्य से जोड़कर विकसित करने पर काम कर रहा है।

प्रस्तावित प्रक्रिया में वैज्ञानिक रूप से अपघटित पत्तियों में आवश्यक जैविक पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों को शामिल किया जाएगा। इससे तैयार खाद का उपयोग कैंपस गार्डन, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मृदा सुधार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकेगा।

संसार ग्रीन के लिए यह परियोजना मृदा स्वास्थ्य, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और जैविक कृषि से जुड़े अपने अनुभव को sustainable green-waste management के साथ जोड़ने का अवसर भी है।

परियोजना में संसार ग्रीन करेगा निवेश

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत परियोजना के लिए आवश्यक मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और अन्य परिचालन खर्च संसार ग्रीन द्वारा वहन किए जाएंगे। वहीं आईआईटी (आईएसएम) धनबाद उत्पादन और तैयार जैविक खाद के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराएगा।

इस प्रकार संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर और संसार ग्रीन की तकनीकी एवं परिचालन क्षमता को एक साथ जोड़कर एक व्यावहारिक Waste-to-Wealth मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

Rajeev Singh of Sansar Green during a meeting at IIT (ISM) Dhanbad on the project to convert dry leaves into enriched organic manure.
IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green discuss the proposed project for scientific utilisation of dry leaves and production of enriched organic manure.

कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना

इस परियोजना के तहत तैयार जैविक खाद का उपयोग आईआईटी (आईएसएम) परिसर के उद्यानों, नर्सरी, पौधरोपण और लैंडस्केपिंग में किया जा सकेगा। इसके साथ इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है।

इससे परियोजना का उद्देश्य केवल कैंपस के सूखे पत्तों का निस्तारण करना नहीं रहेगा, बल्कि उनसे तैयार उपयोगी जैविक संसाधन को कृषि, बागवानी और मृदा स्वास्थ्य से जोड़ना भी होगा।

भविष्य में सफल मॉडल विकसित होने पर विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, उद्योगों, हाउसिंग सोसायटियों और नगर निकायों जैसे ऐसे स्थानों पर भी इस अवधारणा को अपनाने की संभावना देखी जा सकती है, जहां बड़ी मात्रा में biodegradable green waste उत्पन्न होता है। इस व्यापक उपयोग की संभावना का उल्लेख परियोजना से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों में भी किया गया है।

Waste to Wealth: कचरे से संसाधन की ओर

इस पहल का मूल विचार बहुत सरल है—पेड़ से गिरने के बाद पत्ती का उपयोग समाप्त नहीं हो जाता।

उचित वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से उसी पत्ती के जैविक पदार्थ को उपयोगी खाद में बदलकर दोबारा मिट्टी तक पहुंचाया जा सकता है।

संसार ग्रीन और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की यह पहल इसी प्राकृतिक चक्र को विज्ञान और माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने का प्रयास है।

सूखी पत्तियां → जैविक संसाधन → समृद्ध जैविक खाद → स्वस्थ मिट्टी → बेहतर पौध विकास

इस प्रकार जो जैविक पदार्थ मिट्टी और पेड़ों से आया है, उसे वैज्ञानिक तरीके से उपयोगी बनाकर पुनः मिट्टी तक पहुंचाना इस परियोजना की मूल अवधारणा है।

Related Media Coverage

इस पहल को मीडिया में भी स्थान मिला है। 15 सितंबर 2026 को दैनिक जागरण ने परियोजना पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें सूखी पत्तियों से जैविक खाद तैयार करने, संसार ग्रीन की भूमिका और तैयार खाद को किसानों तथा अन्य उपयोगकर्ताओं तक उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख किया गया।

Read the Dainik Jagran coverage

Three Societies ने भी 15 सितंबर 2026 को इस पहल पर रिपोर्ट प्रकाशित की और इसे sustainable waste management, soil health तथा organic farming से जोड़ा।

Read the Three Societies coverage

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Media Coverage: IIT (ISM) Dhanbad–Sansar Green की “सूखे पत्तों से समृद्ध जैविक खाद” पहल को प्रमुख मीडिया में स्थान https://sansargreen.org/iit-ism-dhanbad-sansar-green-media-dry-leaves-organic-manure/ Sat, 19 Sep 2026 05:30:58 +0000 https://sansargreen.org/?p=1916 Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में प्रकाशित खबरों ने Waste-to-Wealth, Soil Health और Sustainable Green Waste Management की पहल को किया रेखांकित धनबाद | सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और उसके इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Private Limited Read More ...

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Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में प्रकाशित खबरों ने Waste-to-Wealth, Soil Health और Sustainable Green Waste Management की पहल को किया रेखांकित

धनबाद | सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और उसके इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Private Limited द्वारा परिसर में गिरने वाली सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में बदलने की प्रस्तावित पहल को विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रमुखता से स्थान मिला है।

Dainik Jagran सहित प्रिंट मीडिया और डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती और Sustainable Waste Management से जोड़ते हुए प्रकाशित किया है। Dainik Jagran की ऑनलाइन रिपोर्ट 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुई, जबकि उपलब्ध समाचार कटिंग में 16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में भी इस विषय को स्थान दिया गया है।

Dainik Bhaskar newspaper coverage of IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green’s initiative to return dry leaves to soil through enriched organic manure.
Dainik Bhaskar highlights the IIT (ISM) Dhanbad–Sansar Green initiative focused on turning dry leaves into a useful resource for soil and agriculture.

सूखे पत्ते कचरा नहीं, मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन

इस पहल का मूल विचार परिसर में गिरने वाली सूखी पत्तियों को जलाने या सामान्य कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपयोग करना है।

प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से डीकंपोज किया जाएगा और तैयार जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी जैविक खाद विकसित करना है जिसका उपयोग मृदा स्वास्थ्य, पौधरोपण, नर्सरी, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और Soil Restoration जैसे क्षेत्रों में किया जा सके।

यह अवधारणा एक सरल चक्र पर आधारित है:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व एवं लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → मिट्टी में वापसी

Dainik Jagran ने प्रमुखता से प्रकाशित की पहल

Dainik Jagran ने “IIT (ISM) की पहल: सूखे पत्ते अब बनेंगे जैविक खाद, पर्यावरण और खेती को मिलेगा लाभ” शीर्षक से इस परियोजना पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की।

रिपोर्ट में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के प्रस्तावित मॉडल के साथ-साथ सूखी पत्तियों के वैज्ञानिक अपघटन, पोषक तत्वों एवं beneficial microorganisms के उपयोग और तैयार खाद के संभावित उपयोगों का उल्लेख किया गया है।

Read the Dainik Jagran coverage

Dainik Bhaskar में “कचरे में नहीं, खेत और मिट्टी में लौटेंगे सूखे पत्ते”

साझा की गई Dainik Bhaskar की मीडिया कटिंग में पहल को “कचरे में नहीं, खेत और मिट्टी में लौटेंगे सूखे पत्ते, आईआईटी आईएसएम की बड़ी पहल” शीर्षक के साथ प्रस्तुत किया गया है।

रिपोर्ट का मुख्य फोकस इस विचार पर है कि संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाली सूखी पत्तियों में मौजूद जैविक पदार्थ को नष्ट करने के बजाय उसे मिट्टी में वापस लौटाया जाए।

यह दृष्टिकोण Waste-to-Wealth के साथ Circular Economy की उस अवधारणा को भी सामने लाता है, जिसमें जैविक कचरे को उसी चक्र में वापस लाने का प्रयास किया जाता है जहां से वह उत्पन्न हुआ था।

डिजिटल मीडिया में भी मिली जगह

Three Societies ने 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, Sustainable Waste Management, Soil Health और Organic Farming से जोड़कर प्रस्तुत किया।

रिपोर्ट में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green द्वारा सूखे पत्तों से पोषक जैविक खाद तैयार करने की योजना के साथ यह भी बताया गया कि तैयार खाद का उपयोग कैंपस गार्डन, नर्सरी, प्लांटेशन, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और Soil Restoration में किया जा सकता है।

Read the Three Societies coverage

राजीव सिंह और Sansar Green की भूमिका

इस प्रस्तावित परियोजना पर हुई रणनीतिक चर्चा में IIT (ISM) Dhanbad के Dean, Innovation & Corporate Relations प्रो. आलोक कुमार दास, Sansar Green के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना और IIT (ISM) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

प्रस्तावित व्यवस्था में मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और अन्य परिचालन खर्च Sansar Green द्वारा वहन किए जाने हैं, जबकि IIT (ISM) Dhanbad उत्पादन और तैयार खाद के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराएगा।

इससे संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप की कार्यान्वयन क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना

इस पहल का उद्देश्य केवल IIT (ISM) परिसर की सूखी पत्तियों का प्रबंधन करना नहीं है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार तैयार खाद का उपयोग कैंपस के उद्यान, नर्सरी, पौधरोपण और लैंडस्केपिंग में करने के साथ किसानों, गार्डनर्स, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है।

यदि यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, औद्योगिक परिसरों, हाउसिंग सोसायटियों और स्थानीय निकायों जैसे बड़े green-waste generators के लिए भी इसी प्रकार के मॉडल की उपयोगिता पर विचार किया जा सकता है। Dainik Jagran में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास ने भी ऐसे व्यापक मॉडल की परिकल्पना का उल्लेख किया है।

IIT (ISM) और Sansar Green के सहयोग का विस्तार

यह पहल IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के बीच पहला सहयोग नहीं है। IIT (ISM) के आधिकारिक अगस्त 2025 प्रेस रिलीज के अनुसार, CIIE, IIT (ISM) Dhanbad Foundation और Sansar Green ने AI-powered organic farming solutions के लिए रणनीतिक सहयोग किया था। इसमें AI-driven soil-health analysis, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार crop recommendations और native microbial strains के आधार पर region-specific biofertilizer production जैसे घटक शामिल थे।

इस संदर्भ में सूखी पत्तियों से enriched organic manure विकसित करने की प्रस्तावित पहल, soil health, microbial technology और sustainable agriculture से जुड़े व्यापक सहयोग का एक व्यावहारिक विस्तार है।

Waste to Wealth से Soil to Sustainability की ओर

Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में मिली कवरेज इस पहल के एक साझा संदेश को सामने लाती है—सूखी पत्तियां केवल कचरा नहीं हैं।

वैज्ञानिक प्रक्रिया, पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के माध्यम से इन्हें दोबारा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।

इस पहल का मूल विचार इसी चक्र में समाहित है:

Waste to Wealth | Soil Health | Beneficial Microorganisms | Organic Farming | Circular Economy

सूखी पत्तियां मिट्टी से आती हैं और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उन्हें उपयोगी जैविक पदार्थ के रूप में दोबारा मिट्टी तक पहुंचाना इस परियोजना की केंद्रीय अवधारणा है।

Dainik Jagran coverage dated September 2026 featuring the IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green project for converting dry leaves into enriched organic manure.
Dainik Jagran reports on IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green’s plan to scientifically transform dry leaves into nutrient-rich organic manure.

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