Indigenous Healing Traditions Archives - Sansar Institute of Agricultural Research & Training https://sansargreen.org/tag/indigenous-healing-traditions/ (प्रयोगशाला से खेत तक, ज्ञान से समृद्धि तक) Sun, 11 Oct 2026 06:49:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 https://sansargreen.org/wp-content/uploads/2026/06/SIART_rajeev-Background-Removed.png Indigenous Healing Traditions Archives - Sansar Institute of Agricultural Research & Training https://sansargreen.org/tag/indigenous-healing-traditions/ 32 32 प्रभात खबर में राजीव सिंह की होड़ोपैथी पहल को प्रमुखता: आदिवासी ज्ञान, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण पर जोर https://sansargreen.org/prabhat-khabar-rajeev-singh-hodopathy-conservation-jharkhand/ Sun, 11 Oct 2026 06:49:00 +0000 https://sansargreen.org/?p=1976 प्रभात खबर | झारखंड संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी ज्ञान-विरासत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होड़ोपैथी, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को प्रभात खबर Read More ...

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प्रभात खबर | झारखंड संस्करण | 9 अक्टूबर 2026

झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी ज्ञान-विरासत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होड़ोपैथी, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को प्रभात खबर ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के अंक में प्रमुखता से स्थान दिया। समाचार में आदिवासी ज्ञान के दस्तावेजीकरण, जैव विविधता संरक्षण और इस अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

गिरिडीह में आयोजित कार्यक्रम में Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com का शुभारंभ किया गया। इन डिजिटल मंचों का उद्देश्य आदिवासी बुजुर्गों, पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय ज्ञानधारकों के अनुभवों को व्यवस्थित रूप से संकलित और संरक्षित करना है। पीढ़ियों से मौखिक परंपराओं के माध्यम से आगे बढ़ता यह ज्ञान आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान के साथ प्रकृति और वनस्पतियों से उसके गहरे संबंध को भी दर्शाता है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, होड़ोपैथी संरक्षण अभियान को तीन चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है। पहले चरण में पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में अनुभवी वैद्यों के अनुभवों और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित पुस्तक प्रकाशित की जाएगी। तीसरे चरण में युवाओं को औषधीय पौधों की पहचान, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण देने के साथ शोध संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक अध्ययन की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस अभियान से गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क को भी जोड़ा गया है। इसके माध्यम से स्थानीय औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण एवं संवर्धन, वन जैव विविधता की सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पहल का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को केवल डिजिटल दस्तावेजों तक सीमित न रखकर उससे जुड़े प्राकृतिक संसाधनों और जंगलों के संरक्षण को भी प्रोत्साहित करना है।

राजीव सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आदिवासी समुदायों की ज्ञान-विरासत को सुरक्षित रखने के लिए उन औषधीय पौधों और जंगलों को बचाना भी आवश्यक है, जिनसे यह ज्ञान सदियों से जुड़ा रहा है। उन्होंने ज्ञानधारकों की सहमति, अधिकारों और योगदान के सम्मान को अभियान का महत्वपूर्ण आधार बताया।

इस पहल के माध्यम से आदिवासी बुजुर्गों के अनुभव, युवाओं की भागीदारी, डिजिटल तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान को एक साझा संरक्षण प्रयास से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसका व्यापक उद्देश्य झारखंड की पारंपरिक ज्ञान-संपदा को सुरक्षित रखते हुए औषधीय पौधों, जंगलों और प्राकृतिक जैव विविधता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

होड़ोपैथी संरक्षण की इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए प्रभात खबर का हार्दिक आभार। यह मीडिया कवरेज झारखंड की समृद्ध आदिवासी ज्ञान-परंपरा और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाने में सहायक होगा।

साभार: प्रभात खबर, झारखंड संस्करण, 9 अक्टूबर 2026।

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