Sansar Green https://sansargreen.org/ (प्रयोगशाला से खेत तक, ज्ञान से समृद्धि तक) Sun, 11 Oct 2026 09:55:24 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.4 https://sansargreen.org/wp-content/uploads/2026/10/Logo-Sansar-Green-Small.png Sansar Green https://sansargreen.org/ 32 32 गिरिडीह में होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों का लोकार्पण, आदिवासी ज्ञान और औषधीय पौधों के संरक्षण की पहल https://sansargreen.org/rajeev-singh-hodopathy-website-launch-plant-conservation/ Sun, 11 Oct 2026 09:42:47 +0000 https://sansargreen.org/?p=1984 पर्यावरणविद् राजीव सिंह ने पारंपरिक आदिवासी बुजुर्गों की उपस्थिति में Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com का किया शुभारंभ। सदियों पुरानी आदिवासी ज्ञान-विरासत को डिजिटल माध्यम से सहेजने, औषधीय पौधों के संरक्षण और जंगलों की जैव विविधता बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण Read More ...

The post गिरिडीह में होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों का लोकार्पण, आदिवासी ज्ञान और औषधीय पौधों के संरक्षण की पहल appeared first on Sansar Green.

]]>
पर्यावरणविद् राजीव सिंह ने पारंपरिक आदिवासी बुजुर्गों की उपस्थिति में Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com का किया शुभारंभ। सदियों पुरानी आदिवासी ज्ञान-विरासत को डिजिटल माध्यम से सहेजने, औषधीय पौधों के संरक्षण और जंगलों की जैव विविधता बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।

गिरिडीह, झारखंड | 8 अक्टूबर 2026

झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होड़ोपैथी (Hodopathy), औषधीय पौधों और जंगलों से जुड़े ज्ञान को संरक्षित करने के उद्देश्य से गिरिडीह में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। पर्यावरणविद्, कृषि उद्यमी एवं सतत विकास के क्षेत्र में कार्यरत राजीव सिंह ने 8 अक्टूबर 2026 को होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों—Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com—का लोकार्पण किया।

गिरिडीह स्थित उनके आवासीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी समाज के पारंपरिक बुजुर्गों, स्थानीय ज्ञानधारकों, सामाजिक प्रतिनिधियों और युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पीढ़ियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित आदिवासी ज्ञान को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ना और इस अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।

इस पहल के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण के साथ-साथ औषधीय पौधों की पहचान, उनके संरक्षण, जंगलों की जैव विविधता, पर्यावरणीय जागरूकता तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को भी प्रोत्साहित करने की योजना है।

सदियों पुरानी आदिवासी ज्ञान-विरासत को सहेजने का प्रयास

होड़ोपैथी झारखंड के आदिवासी समुदायों से जुड़ी एक पारंपरिक स्वदेशी चिकित्सा एवं वनस्पति ज्ञान प्रणाली है। यह पीढ़ियों से प्रकृति, जंगलों और स्थानीय औषधीय पौधों के साथ आदिवासी समाज के गहरे संबंधों को दर्शाती है।

आदिवासी समाज के बुजुर्गों और पारंपरिक वैद्यों के पास स्थानीय वनस्पतियों की पहचान, उनके पारंपरिक उपयोग, संरक्षण तथा प्रकृति के साथ संतुलित जीवन से संबंधित व्यापक अनुभवजन्य ज्ञान रहा है।

इस ज्ञान का बड़ा हिस्सा लिखित पुस्तकों के बजाय मौखिक परंपराओं के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचता रहा है।

बदलती जीवनशैली, नई पीढ़ी का पारंपरिक ज्ञान से दूर होना, जंगलों का क्षरण और औषधीय पौधों के प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते दबाव के कारण इस विरासत के संरक्षण की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

ऐसी स्थिति में होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों का शुभारंभ पारंपरिक ज्ञान को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने और उसके संरक्षण के लिए एक डिजिटल आधार तैयार करने का प्रयास है।

तीन वेबसाइटों के माध्यम से डिजिटल संरक्षण की शुरुआत

लोकार्पित तीनों वेबसाइटों का उद्देश्य होड़ोपैथी से संबंधित जानकारी, पारंपरिक ज्ञान, औषधीय पौधों और पर्यावरण संरक्षण के विषयों को व्यापक स्तर पर सामने लाना है।

Hodopathy.org के माध्यम से आदिवासी ज्ञान-विरासत, औषधीय पौधों और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े विषयों को प्रोत्साहित करने की परिकल्पना की गई है।

Hodopathy.in का उद्देश्य होड़ोपैथी की पारंपरिक पृष्ठभूमि, स्वदेशी ज्ञान, वनस्पतियों और संभावित वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना है।

Hodopathy.com के माध्यम से जनजागरूकता, शैक्षणिक सामग्री और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण संबंधी गतिविधियों को व्यापक लोगों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

इन तीनों डिजिटल मंचों को भविष्य में पारंपरिक ज्ञानधारकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के बीच संवाद का माध्यम बनाने की परिकल्पना है।

आदिवासी बुजुर्गों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को बनाया विशेष

लोकार्पण कार्यक्रम की विशेषता आदिवासी समाज के पारंपरिक बुजुर्गों और स्थानीय ज्ञानधारकों की भागीदारी रही।

ये बुजुर्ग उस ज्ञान परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जिसे उनके पूर्वजों ने सदियों तक अनुभव, अवलोकन और प्रकृति के साथ निरंतर संपर्क के माध्यम से संरक्षित रखा है।

कार्यक्रम में उनकी भागीदारी इस बात का प्रतीक रही कि होड़ोपैथी का संरक्षण केवल वेबसाइट बनाने या जानकारी एकत्र करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मूल ज्ञानधारकों का सम्मान और सक्रिय सहयोग आवश्यक है।

पहल के अंतर्गत भविष्य में अनुभवी बुजुर्गों और पारंपरिक वैद्यों से संवाद स्थापित कर उनकी सहमति से ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने की योजना है।

इस दौरान स्थानीय पौधों के नाम, उनकी पहचान, पारंपरिक उपयोग से जुड़े सांस्कृतिक संदर्भ तथा पर्यावरणीय अनुभवों को सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया जाएगा।

राजीव सिंह की पहल: ज्ञान के साथ जंगलों को भी बचाना जरूरी

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत राजीव सिंह की यह पहल पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करती है।

आदिवासी समुदायों की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ जंगलों, औषधीय वनस्पतियों, स्थानीय जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी रही हैं।

यदि जंगलों में पाए जाने वाले औषधीय पौधे समाप्त होते हैं, तो उनके साथ उनसे संबंधित पारंपरिक जानकारी के लुप्त होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसी प्रकार, यदि अनुभवी ज्ञानधारकों के अनुभवों को समय रहते संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ इस विरासत के महत्वपूर्ण हिस्से से वंचित हो सकती हैं।

इसलिए होड़ोपैथी पहल का उद्देश्य केवल पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का दस्तावेजीकरण करना नहीं, बल्कि औषधीय पौधों के संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरणीय जागरूकता को भी बढ़ावा देना है।

यह प्रयास सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़ता है।

गांडेय में होड़ोपैथी पार्क से औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा

इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गिरिडीह जिले के गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क से भी जुड़ा है।

होड़ोपैथी पार्क की परिकल्पना औषधीय पौधों के संरक्षण, पहचान, संवर्धन और पर्यावरणीय शिक्षा को बढ़ावा देने वाले केंद्र के रूप में की गई है।

इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर औषधीय पौधों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण तथा उनके पारंपरिक और पारिस्थितिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने की योजना है।

भविष्य में यहाँ विद्यार्थियों, युवाओं, पर्यावरण प्रेमियों और पारंपरिक ज्ञानधारकों के लिए शैक्षणिक एवं जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित करने की संभावनाएँ भी हैं।

इस प्रकार डिजिटल दस्तावेजीकरण और धरातल पर वनस्पति संरक्षण के प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

पारंपरिक वैद्यों के अनुभवों का दस्तावेजीकरण और पुस्तक प्रकाशन की योजना

होड़ोपैथी पहल के अंतर्गत आदिवासी बुजुर्गों और पारंपरिक वैद्यों के अनुभवों को व्यवस्थित रूप से संकलित करने की योजना भी बनाई गई है।

इसका उद्देश्य स्थानीय ज्ञान, वनस्पतियों की पहचान, पारंपरिक प्रथाओं और उनसे जुड़े सांस्कृतिक अनुभवों को सुरक्षित रखना है।

इसके साथ ही अनुभवी ज्ञानधारकों की जानकारी और योगदान पर आधारित एक पुस्तक तैयार करने की भी परिकल्पना है।

इससे मौखिक परंपराओं में संरक्षित जानकारी को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचाने में सहायता मिल सकती है।

हालाँकि, पारंपरिक उपचार संबंधी जानकारी का दस्तावेजीकरण और किसी उपचार की वैज्ञानिक प्रभावशीलता सिद्ध होना अलग-अलग विषय हैं। औषधीय उपयोगों की सुरक्षा एवं प्रभावशीलता का मूल्यांकन उपयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से किया जाना आवश्यक होगा।

ज्ञान संग्रह के दौरान संबंधित समुदायों की सहमति, पारंपरिक अधिकारों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का सम्मान करना भी इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

वैज्ञानिक अनुसंधान और विश्वविद्यालयों से सहयोग की संभावनाएँ

होड़ोपैथी से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक अध्ययन से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास करने की योजना है।

इसके अंतर्गत औषधीय पौधों की वैज्ञानिक पहचान, वनस्पति विविधता, संरक्षण तकनीकों और पारंपरिक उपयोगों से संबंधित अध्ययन की संभावनाएँ तलाशने का उद्देश्य है।

भविष्य में विश्वविद्यालयों, कृषि एवं वनस्पति अनुसंधान संस्थानों तथा विषय विशेषज्ञों के साथ सहयोग स्थापित करने की परिकल्पना की गई है।

ऐसे सहयोग से पारंपरिक ज्ञान के जिम्मेदार दस्तावेजीकरण, वनस्पति संरक्षण और वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

युवाओं को जोड़कर अगली पीढ़ी तक पहुँचाई जाएगी विरासत

होड़ोपैथी पहल में युवाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

आने वाले समय में स्थानीय युवाओं को औषधीय पौधों की पहचान, पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संबंधी जागरूकता गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।

युवा पीढ़ी डिजिटल तकनीक के माध्यम से बुजुर्गों के अनुभवों को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इसके लिए भविष्य में प्रशिक्षण कार्यक्रम, संवाद सत्र, वनस्पति पहचान गतिविधियाँ और पर्यावरणीय जागरूकता अभियान आयोजित करने की संभावनाएँ हैं।

इस प्रयास से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच एक सार्थक संबंध विकसित हो सकता है।

आदिवासी समुदायों के अधिकार और सम्मान को प्राथमिकता

पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण तभी सार्थक होगा, जब उसके मूल ज्ञानधारकों और संबंधित समुदायों के अधिकारों का सम्मान किया जाए।

होड़ोपैथी पहल में ज्ञान के दस्तावेजीकरण के दौरान संबंधित व्यक्तियों और समुदायों की सहमति, उनके योगदान की पहचान तथा संवेदनशील जानकारी के जिम्मेदार उपयोग को महत्व देने की बात कही गई है।

इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को उसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से अलग किए बिना सुरक्षित रखना है।

भविष्य में किसी शोध, प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग की स्थिति में लागू कानूनी प्रावधानों और समुदायों के अधिकारों का पालन करना आवश्यक होगा।

झारखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण की नई दिशा

झारखंड के आदिवासी समुदायों की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ राज्य की सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों का 8 अक्टूबर 2026 को हुआ लोकार्पण इस विरासत को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने की दिशा में एक शुरुआती कदम है।

इस पहल के माध्यम से पारंपरिक बुजुर्गों के अनुभवों, औषधीय पौधों के संरक्षण, जंगलों की जैव विविधता और वैज्ञानिक अध्ययन की संभावनाओं को एक साझा मंच से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इसका दीर्घकालिक उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें आदिवासी समाज की पारंपरिक जानकारी को सम्मान मिले, युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिले।

होड़ोपैथी की इस पहल का मूल संदेश है कि सदियों पुराने आदिवासी ज्ञान को बचाने के लिए उसके ज्ञानधारकों, औषधीय पौधों, जंगलों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com के माध्यम से इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि झारखंड की अमूल्य आदिवासी ज्ञान-विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारीपूर्वक सुरक्षित रखा जा सके।


होड़ोपैथी पहल के बारे में

होड़ोपैथी पहल पर्यावरणविद् राजीव सिंह द्वारा गिरिडीह, झारखंड में आगे बढ़ाया जा रहा एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण, औषधीय पौधों का संवर्धन, जंगलों की जैव विविधता की सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहन और युवाओं में पर्यावरणीय जागरूकता विकसित करना है।

आधिकारिक वेबसाइटें:

कार्यक्रम: होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों का लोकार्पण
तिथि: 8 अक्टूबर 2026
स्थान: गिरिडीह, झारखंड
लोकार्पणकर्ता: राजीव सिंह
प्रमुख सहभागी: पारंपरिक आदिवासी बुजुर्ग, स्थानीय ज्ञानधारक एवं सामुदायिक प्रतिनिधि
मुख्य उद्देश्य: आदिवासी ज्ञान-विरासत का डिजिटल संरक्षण, औषधीय पौधों का संवर्धन एवं वन जैव विविधता की सुरक्षा

The post गिरिडीह में होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों का लोकार्पण, आदिवासी ज्ञान और औषधीय पौधों के संरक्षण की पहल appeared first on Sansar Green.

]]>
द टाइम्स ऑफ इंडिया में राजीव सिंह की पहल को प्रमुखता: आदिवासी ज्ञान, औषधीय पौधों और वन संरक्षण पर जोर https://sansargreen.org/times-of-india-rajeev-singh-medicinal-plant-conservation/ Sun, 11 Oct 2026 08:29:25 +0000 https://sansargreen.org/?p=1979 द टाइम्स ऑफ इंडिया | रांची संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी पारंपरिक ज्ञान-विरासत, औषधीय वनस्पतियों और जंगलों के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को देश के प्रमुख Read More ...

The post द टाइम्स ऑफ इंडिया में राजीव सिंह की पहल को प्रमुखता: आदिवासी ज्ञान, औषधीय पौधों और वन संरक्षण पर जोर appeared first on Sansar Green.

]]>
द टाइम्स ऑफ इंडिया | रांची संस्करण | 9 अक्टूबर 2026

झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी पारंपरिक ज्ञान-विरासत, औषधीय वनस्पतियों और जंगलों के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को देश के प्रमुख अंग्रेजी समाचारपत्र द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के रांची संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया। समाचार में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान-प्रणाली होड़ोपैथी के संरक्षण को पर्यावरणीय स्थिरता, जैव विविधता और वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने के प्रयासों को विशेष स्थान दिया गया।

गिरिडीह में आयोजित कार्यक्रम में Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com का शुभारंभ किया गया। इन डिजिटल मंचों का उद्देश्य आदिवासी बुजुर्गों, पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय ज्ञानधारकों के अनुभवों को दस्तावेजीकृत करना तथा औषधीय पौधों से जुड़ी पारंपरिक जानकारी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।

समाचार के अनुसार, अभियान तीन चरणों में आगे बढ़ेगा। पहले चरण में पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में अनुभवी वैद्यों के अनुभवों और औषधीय वनस्पतियों पर पुस्तक प्रकाशित करने की योजना है। तीसरे चरण में युवाओं को पौधों की पहचान, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण देने के साथ शोध संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक अध्ययन को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इस पहल से गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क को भी जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन और वन जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य है।

राजीव सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए उससे जुड़े जंगलों, औषधीय पौधों और प्राकृतिक आवासों का संरक्षण भी आवश्यक है। अभियान में ज्ञानधारकों की सहमति, अधिकारों और योगदान का सम्मान करते हुए स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह पहल पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक अध्ययन और प्रकृति संरक्षण के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक प्रयास है। इसका व्यापक उद्देश्य झारखंड की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाना है।

साभार: द टाइम्स ऑफ इंडिया, रांची संस्करण, पृष्ठ 5, 9 अक्टूबर 2026।

The post द टाइम्स ऑफ इंडिया में राजीव सिंह की पहल को प्रमुखता: आदिवासी ज्ञान, औषधीय पौधों और वन संरक्षण पर जोर appeared first on Sansar Green.

]]>
प्रभात खबर में राजीव सिंह की होड़ोपैथी पहल को प्रमुखता: आदिवासी ज्ञान, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण पर जोर https://sansargreen.org/prabhat-khabar-rajeev-singh-hodopathy-conservation-jharkhand/ Sun, 11 Oct 2026 06:49:00 +0000 https://sansargreen.org/?p=1976 प्रभात खबर | झारखंड संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी ज्ञान-विरासत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होड़ोपैथी, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को प्रभात खबर Read More ...

The post प्रभात खबर में राजीव सिंह की होड़ोपैथी पहल को प्रमुखता: आदिवासी ज्ञान, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण पर जोर appeared first on Sansar Green.

]]>
प्रभात खबर | झारखंड संस्करण | 9 अक्टूबर 2026

झारखंड के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी ज्ञान-विरासत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होड़ोपैथी, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद् एवं कृषि उद्यमी राजीव सिंह की पहल को प्रभात खबर ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के अंक में प्रमुखता से स्थान दिया। समाचार में आदिवासी ज्ञान के दस्तावेजीकरण, जैव विविधता संरक्षण और इस अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

गिरिडीह में आयोजित कार्यक्रम में Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com का शुभारंभ किया गया। इन डिजिटल मंचों का उद्देश्य आदिवासी बुजुर्गों, पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय ज्ञानधारकों के अनुभवों को व्यवस्थित रूप से संकलित और संरक्षित करना है। पीढ़ियों से मौखिक परंपराओं के माध्यम से आगे बढ़ता यह ज्ञान आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान के साथ प्रकृति और वनस्पतियों से उसके गहरे संबंध को भी दर्शाता है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, होड़ोपैथी संरक्षण अभियान को तीन चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है। पहले चरण में पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में अनुभवी वैद्यों के अनुभवों और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित पुस्तक प्रकाशित की जाएगी। तीसरे चरण में युवाओं को औषधीय पौधों की पहचान, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण देने के साथ शोध संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक अध्ययन की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस अभियान से गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क को भी जोड़ा गया है। इसके माध्यम से स्थानीय औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण एवं संवर्धन, वन जैव विविधता की सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पहल का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को केवल डिजिटल दस्तावेजों तक सीमित न रखकर उससे जुड़े प्राकृतिक संसाधनों और जंगलों के संरक्षण को भी प्रोत्साहित करना है।

राजीव सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आदिवासी समुदायों की ज्ञान-विरासत को सुरक्षित रखने के लिए उन औषधीय पौधों और जंगलों को बचाना भी आवश्यक है, जिनसे यह ज्ञान सदियों से जुड़ा रहा है। उन्होंने ज्ञानधारकों की सहमति, अधिकारों और योगदान के सम्मान को अभियान का महत्वपूर्ण आधार बताया।

इस पहल के माध्यम से आदिवासी बुजुर्गों के अनुभव, युवाओं की भागीदारी, डिजिटल तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान को एक साझा संरक्षण प्रयास से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसका व्यापक उद्देश्य झारखंड की पारंपरिक ज्ञान-संपदा को सुरक्षित रखते हुए औषधीय पौधों, जंगलों और प्राकृतिक जैव विविधता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

होड़ोपैथी संरक्षण की इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए प्रभात खबर का हार्दिक आभार। यह मीडिया कवरेज झारखंड की समृद्ध आदिवासी ज्ञान-परंपरा और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाने में सहायक होगा।

साभार: प्रभात खबर, झारखंड संस्करण, 9 अक्टूबर 2026।

The post प्रभात खबर में राजीव सिंह की होड़ोपैथी पहल को प्रमुखता: आदिवासी ज्ञान, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण पर जोर appeared first on Sansar Green.

]]>
गिरिडीह में होड़ोपैथी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण की पहल: दैनिक जागरण में राजीव सिंह के अभियान को प्रमुखता https://sansargreen.org/dainik-jagran-hodopathy-conservation-rajeev-singh-giridih-2026/ Sat, 10 Oct 2026 05:43:42 +0000 https://sansargreen.org/?p=1969 झारखंड की सदियों पुरानी आदिवासी ज्ञान-विरासत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण के लिए तीन वेबसाइटों का लोकार्पण। दैनिक जागरण | धनबाद संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 गिरिडीह, झारखंड: पर्यावरणविद्, कृषि उद्यमी एवं सतत विकास के क्षेत्र Read More ...

The post गिरिडीह में होड़ोपैथी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण की पहल: दैनिक जागरण में राजीव सिंह के अभियान को प्रमुखता appeared first on Sansar Green.

]]>
झारखंड की सदियों पुरानी आदिवासी ज्ञान-विरासत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण के लिए तीन वेबसाइटों का लोकार्पण।

दैनिक जागरण | धनबाद संस्करण | 9 अक्टूबर 2026

गिरिडीह, झारखंड: पर्यावरणविद्, कृषि उद्यमी एवं सतत विकास के क्षेत्र में सक्रिय राजीव सिंह द्वारा झारखंड की पारंपरिक आदिवासी चिकित्सा पद्धति होड़ोपैथी (Hodopathy) और उससे जुड़ी सदियों पुरानी ज्ञान-विरासत के संरक्षण के लिए शुरू किए गए अभियान को देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रमुखता से स्थान दिया।

“गिरिडीह में होड़ोपैथी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण की पहल” शीर्षक से प्रकाशित समाचार में आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, औषधीय पौधों के संरक्षण, जंगलों की जैव विविधता को सुरक्षित रखने तथा इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।

इस पहल के अंतर्गत राजीव सिंह के गिरिडीह स्थित आवासीय कार्यालय में तीन समर्पित डिजिटल मंचों — Hodopathy.org, Hodopathy.in और Hodopathy.com — का लोकार्पण किया गया। इन वेबसाइटों के माध्यम से आदिवासी बुजुर्गों, अनुभवी पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय वनस्पति जानकारों के अनुभवों एवं ज्ञान को व्यवस्थित रूप से संकलित और संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।

यह अभियान गिरिडीह जिले के गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क से भी जुड़ा है, जिसके माध्यम से पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ औषधीय पौधों के संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की योजना है।

सदियों पुराने आदिवासी ज्ञान को सहेजने का प्रयास

झारखंड के आदिवासी समुदायों के पास जंगलों, औषधीय पौधों और उनके पारंपरिक उपयोगों से संबंधित पीढ़ियों पुराना ज्ञान है। इस ज्ञान का बड़ा हिस्सा आज भी मौखिक परंपराओं और बुजुर्गों के अनुभवों में सुरक्षित है।

राजीव सिंह और उनकी टीम अनुभवी पारंपरिक वैद्यों, आदिवासी बुजुर्गों और स्थानीय जानकारों से संवाद कर उनके अनुभवों तथा औषधीय वनस्पतियों से जुड़ी जानकारी का दस्तावेजीकरण कर रही है। संकलित जानकारी की तथ्य-जाँच और उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य से तुलना भी की जा रही है।

इस प्रयास का उद्देश्य केवल पारंपरिक ज्ञान को दर्ज करना नहीं, बल्कि उसे सम्मानपूर्वक संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी और भविष्य के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी बनाना है।

डिजिटल संग्रह, पुस्तक प्रकाशन और युवाओं को प्रशिक्षण

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान को तीन चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है।

पहले चरण में पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में वरिष्ठ पारंपरिक वैद्यों के अनुभवों, औषधीय पौधों की पहचान और उनके पारंपरिक उपयोगों पर आधारित पुस्तक प्रकाशित की जाएगी।

तीसरे चरण में युवाओं को औषधीय वनस्पतियों की पहचान, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके साथ शोध संस्थानों के सहयोग से चयनित पारंपरिक उपचार पद्धतियों की प्रभावशीलता और सुरक्षा पर वैज्ञानिक अध्ययन का भी प्रयास किया जाएगा।

औषधीय पौधों और जंगलों का संरक्षण भी आवश्यक

राजीव सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि होड़ोपैथी के ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए उन औषधीय पौधों और जंगलों का संरक्षण भी आवश्यक है, जिनसे यह परंपरा जुड़ी हुई है।

अभियान के माध्यम से स्थानीय औषधीय वनस्पतियों की पहचान, पौधरोपण, संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने पारंपरिक वैद्यों, आदिवासी बुजुर्गों, वनस्पति जानकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं से इस अभियान में भागीदारी की अपील की। दस्तावेजीकरण में ज्ञानधारकों की सहमति, अधिकारों और योगदान के सम्मान को प्राथमिकता दी जाएगी।

लोकार्पण कार्यक्रम में समुदाय और सहयोगियों की भागीदारी

वेबसाइटों के लोकार्पण कार्यक्रम में सीए राकेश, रिमी सिंह, समन, शुभम, सोनाली, आंचल सिंह, आनंद मुर्मू, विनीता टुडू और मनोज हेंब्रम सहित पारंपरिक वैद्य, आदिवासी समाज के प्रतिनिधि और अन्य सहयोगी उपस्थित थे।

ज्ञान का संरक्षण, पौधों की सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और ज्ञान का प्रसार इस पहल के चार प्रमुख उद्देश्य हैं।

राजीव सिंह ने अभियान को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए दैनिक जागरण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी ज्ञान-विरासत, औषधीय वनस्पतियों और जंगलों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।

यह पहल झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सहेजने के साथ पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के बीच सार्थक संबंध स्थापित करने की दिशा में एक प्रयास है।

The post गिरिडीह में होड़ोपैथी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण की पहल: दैनिक जागरण में राजीव सिंह के अभियान को प्रमुखता appeared first on Sansar Green.

]]>
गिरिडीह के TEJAS कार्यक्रम में राजीव सिंह ने युवाओं को दिया उद्यमिता का संदेश https://sansargreen.org/rajeev-singh-tejas-giridih-2026-hindi/ Thu, 01 Oct 2026 04:56:16 +0000 https://sansargreen.org/?p=1958 संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने साझा किए स्टार्टअप, कृषि नवाचार और स्थानीय अवसरों से व्यवसाय खड़ा करने के अनुभव गिरिडीह, 29 सितंबर 2026। गिरिडीह जिला समाहरणालय में आयोजित TEJAS कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध Read More ...

The post गिरिडीह के TEJAS कार्यक्रम में राजीव सिंह ने युवाओं को दिया उद्यमिता का संदेश appeared first on Sansar Green.

]]>
संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने साझा किए स्टार्टअप, कृषि नवाचार और स्थानीय अवसरों से व्यवसाय खड़ा करने के अनुभव

गिरिडीह, 29 सितंबर 2026। गिरिडीह जिला समाहरणालय में आयोजित TEJAS कार्यक्रम में संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं, उद्यमियों, विद्यार्थियों और स्टार्टअप संस्थापकों को संबोधित करते हुए स्थानीय समस्याओं के समाधान, तकनीक के उपयोग और बाजार की समझ के आधार पर व्यवसाय विकसित करने के व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

“छोटे शहर से शुरुआत हो सकती है, लेकिन सपनों की सीमा छोटी नहीं होनी चाहिए।”

इस संदेश के साथ श्री सिंह ने युवाओं को अपने क्षेत्र की संभावनाएँ पहचानने और छोटे, ठोस कदमों से उद्यमिता की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में उपायुक्त, गिरिडीह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही उप विकास आयुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उद्योग विभाग के महाप्रबंधक, डीपीआईआईटी के प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, व्यवसायी और युवा उद्यमी भी शामिल हुए।

संसार ग्रीन की यात्रा से साझा की उद्यमिता की सीख

श्री राजीव सिंह ने संसार ग्रीन की उद्यमिता यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उपयोगी व्यवसाय की शुरुआत लोगों की वास्तविक जरूरत को समझने से होती है। किसी समस्या का ऐसा समाधान तैयार करना, जिसे लोग आसानी से अपना सकें और जिस पर भरोसा कर सकें, व्यवसाय की मजबूत नींव बनाता है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि किसानों तक समय पर सही सलाह पहुँचाना, गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना और स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार से जोड़ना उद्यमिता के महत्वपूर्ण अवसर हो सकते हैं।

उनके अनुसार, उद्यमी के लिए ग्राहकों से संवाद करना, उनकी कठिनाइयों को समझना और प्रतिक्रिया के आधार पर अपने उत्पाद या सेवा में सुधार करना आवश्यक है।

विचार को व्यवसाय में बदलने के लिए व्यावहारिक कदम जरूरी

अपने संबोधन में श्री सिंह ने स्टार्टअप विकास, नवाचार, व्यवसाय करने में सुगमता, डिजिटल कॉमर्स, तकनीक अपनाने और बाजार से जुड़ाव जैसे विषयों पर विचार रखे।

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि किसी विचार पर बड़े स्तर पर निवेश करने से पहले उसकी उपयोगिता और मांग को परखें। इसके लिए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण कदम बताए:

  • संभावित ग्राहकों से बात करके उनकी जरूरत समझें।
  • छोटे स्तर पर अपने उत्पाद या सेवा का परीक्षण करें।
  • लागत, मूल्य निर्धारण और बाजार की मांग का आकलन करें।
  • भरोसेमंद टीम तैयार करें और ग्राहकों से किए वादे पूरे करें।
  • अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर लगातार सुधार करें।

श्री सिंह ने कहा कि पहला सफल परीक्षण, पहला संतुष्ट ग्राहक और पहला दोबारा मिला ऑर्डर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। इनसे उद्यमी को अपने व्यवसाय की दिशा समझने और आगे के निर्णय लेने में मदद मिलती है।

गिरिडीह और झारखंड में उद्यमिता की संभावनाएँ

श्री राजीव सिंह ने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों, विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं और ग्रामीण उद्योगों में गिरिडीह तथा झारखंड की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने बताया कि स्थानीय उद्यमी अपने क्षेत्र के संसाधनों, जरूरतों और चुनौतियों को करीब से जानते हैं। यह समझ व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण ताकत बन सकती है। इसे तकनीक, गुणवत्ता और बाजार तक पहुँच से जोड़कर ऐसे उद्यम विकसित किए जा सकते हैं जो व्यापक स्तर पर ग्राहकों को सेवाएँ दें।

स्थानीय उत्पाद की बेहतर पैकेजिंग, उपयोगी डिजिटल सेवा या कृषि से जुड़ी किसी आपूर्ति समस्या का समाधान भी एक नए व्यवसाय का आधार बन सकता है। जरूरी है कि समाधान व्यावहारिक हो और ग्राहकों तक विश्वसनीय ढंग से पहुँचाया जा सके।

Rajeev Singh, Founder and Managing Director of Sansar Green, speaking behind a flower-decorated podium with TEJAS signage.
गिरिडीह जिला समाहरणालय में 29 सितंबर 2026 को आयोजित TEJAS कार्यक्रम में युवाओं और उद्यमियों को संबोधित करते संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह। उन्होंने स्थानीय संभावनाओं, कृषि नवाचार और तकनीक के माध्यम से व्यवसाय तथा रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर अपने अनुभव साझा किए।

कृषि, तकनीक और बाजार को जोड़ने की आवश्यकता

संबोधन के दौरान श्री सिंह ने कृषि क्षेत्र में समय पर मार्गदर्शन, विश्वसनीय कृषि सामग्री और मजबूत बाजार संपर्क के महत्व पर जोर दिया।

ये विषय संसार ग्रीन के ‘मिट्टी से मंडी तक’ दृष्टिकोण से भी जुड़े हैं। इस दृष्टिकोण में मिट्टी के स्वास्थ्य, कृषि सामग्री, किसान मार्गदर्शन और बाजार के अवसरों को परस्पर जोड़कर देखा जाता है।

उन्होंने युवाओं को कृषि की पूरी प्रक्रिया में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। खेती से लेकर प्रसंस्करण, पैकिंग और बिक्री तक विभिन्न चरणों में उपयोगी सेवाएँ विकसित की जा सकती हैं।

तकनीक का चयन भी जरूरत के अनुसार होना चाहिए, ताकि वह लोगों का समय बचाए, लागत कम करने में मदद करे या काम को अधिक सुविधाजनक बनाए।

व्यवसाय की प्रगति के साथ दूसरों के लिए भी बनें अवसर

श्री सिंह के संबोधन का एक प्रमुख संदेश था कि उद्यमिता से दूसरों के लिए भी आगे बढ़ने के अवसर पैदा होने चाहिए।

एक विकसित होता व्यवसाय कर्मचारियों, किसानों, आपूर्तिकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं और स्थानीय साझेदारों को काम तथा आय के अवसर दे सकता है। उन्होंने युवाओं को अपने विचारों के आर्थिक पक्ष के साथ उनके सामाजिक योगदान पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

संसार ग्रीन के लिए कृषि, नवाचार और तकनीक को लोगों की आजीविका से जोड़ना उसके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी उपयोगी समाधानों और दीर्घकालिक संबंधों के माध्यम से किसानों, युवाओं तथा ग्रामीण समुदायों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

मार्गदर्शन और सहयोग से मजबूत होगा उद्यमिता का वातावरण

TEJAS कार्यक्रम ने प्रशासन, उद्योग, शिक्षा और स्टार्टअप समुदाय के बीच संवाद का अवसर प्रदान किया।

श्री राजीव सिंह ने निरंतर सीखने, अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन लेने और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। ऐसे संपर्क उभरते उद्यमियों को अपने विचारों का परीक्षण करने, जरूरी जानकारी प्राप्त करने और व्यवसाय की अगली दिशा तय करने में मदद कर सकते हैं।

संसार ग्रीन ने कार्यक्रम में आमंत्रण और विचार साझा करने का अवसर देने के लिए जिला प्रशासन, डीपीआईआईटी के प्रतिनिधियों, उद्योग विभाग तथा सभी आयोजकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

युवाओं के लिए श्री सिंह का संदेश स्पष्ट था—किसी वास्तविक जरूरत को पहचानें, एक उपयोगी समाधान से शुरुआत करें और अनुभव के साथ अपनी क्षमता बढ़ाएँ। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ व्यवसाय भी देशभर में अपनी पहचान बना सकता है।

संसार ग्रीन के बारे में

संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड झारखंड का डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त एग्रीटेक स्टार्टअप है। कंपनी का मुख्यालय रांची में है और गिरिडीह में इसकी गतिविधियाँ संचालित होती हैं।

संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री राजीव सिंह के नेतृत्व में कंपनी जैविक कृषि सामग्री, मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्मजीव आधारित समाधान, किसान सहयोग और कृषि नवाचार के क्षेत्र में कार्य करती है। अपने ‘मिट्टी से मंडी तक’ दृष्टिकोण के माध्यम से संसार ग्रीन कृषि ज्ञान, उपयोगी उत्पादों और बाजार के अवसरों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

The post गिरिडीह के TEJAS कार्यक्रम में राजीव सिंह ने युवाओं को दिया उद्यमिता का संदेश appeared first on Sansar Green.

]]>
कृषि शिक्षा से खेत तक: गढ़वा विश्वविद्यालय में राजीव सिंह का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण https://sansargreen.org/rajeev-singh-garhwa-university-agriculture-farmers-rural-entrepreneurship/ Sat, 26 Sep 2026 13:15:52 +0000 https://sansargreen.org/?p=1942 गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में सहभागी राजीव सिंह ने कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, किसानों और ग्रामीण उद्यमिता के बीच मजबूत संबंध विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों Read More ...

The post कृषि शिक्षा से खेत तक: गढ़वा विश्वविद्यालय में राजीव सिंह का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण appeared first on Sansar Green.

]]>
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में सहभागी राजीव सिंह ने कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, किसानों और ग्रामीण उद्यमिता के बीच मजबूत संबंध विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों में विकसित ज्ञान की वास्तविक सफलता तब है, जब उसका प्रभाव किसान के खेत, ग्रामीण युवाओं के अवसर और स्थानीय अर्थव्यवस्था में दिखाई दे।

संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह की गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में सहभागिता केवल एक औपचारिक शैक्षणिक अवसर नहीं थी। यह उनके उस व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का मंच बनी, जिसमें शिक्षा, कृषि विज्ञान, उद्यमिता और ग्रामीण समाज को एक साझा विकास प्रक्रिया से जोड़ने की परिकल्पना है।

समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलाधिपति दिनेश सिंह, कुलपति डॉ. एम. के. सिंह, वरिष्ठ शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय समुदाय की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने शिक्षा और समाज के बीच संबंधों पर व्यापक संवाद का अवसर प्रदान किया।

उद्योग विशेषज्ञ के रूप में राजीव सिंह ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक समुदाय के साथ अपने विचार साझा किए और विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में संस्थागत ज्ञान को जमीनी जरूरतों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।

Rajeev Singh on stage with Jharkhand Governor Santosh Kumar Gangwar, university leadership and dignitaries during the First Convocation of Garhwa University.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के मंच पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विश्वविद्यालय नेतृत्व एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह।

विश्वविद्यालय और किसान के बीच दूरी कम करनी होगी

भारत में कृषि से संबंधित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के पास वैज्ञानिक ज्ञान, शोध क्षमता और विशेषज्ञता का बड़ा आधार मौजूद है। दूसरी ओर किसान प्रतिदिन मिट्टी, मौसम, फसल रोग, उत्पादन लागत, बाजार और बदलती कृषि परिस्थितियों जैसी वास्तविक चुनौतियों का सामना करते हैं।

राजीव सिंह के अनुसार भविष्य की कृषि व्यवस्था में इन दोनों पक्षों के बीच दूरी कम करना आवश्यक है।

उनका दृष्टिकोण एक ऐसे दो-तरफा ज्ञान तंत्र का है, जिसमें वैज्ञानिक केवल किसानों तक तकनीक पहुँचाने तक सीमित न रहें, बल्कि किसान की वास्तविक समस्याएँ भी विश्वविद्यालय और शोधकर्ताओं तक पहुँचें।

खेत समस्या बताए और विज्ञान समाधान खोजने में सहयोग करे—यही प्रभावी कृषि अनुसंधान की दिशा होनी चाहिए।

गिरिडीह के किसानों तक संस्थागत विशेषज्ञता पहुँचाने की सोच

गढ़वा विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध विशेषज्ञता और तकनीकी ज्ञान को गिरिडीह सहित झारखंड के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों तक किस प्रकार पहुँचाया जा सकता है।

इसमें मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ, जैविक एवं सूक्ष्मजीव आधारित कृषि तकनीक, किसान प्रशिक्षण, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में ज्ञान साझा करने की संभावनाएँ शामिल हैं।

राजीव सिंह का मानना है कि किसान को केवल कृषि उत्पाद उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उसे यह समझने में भी सहयोग मिलना चाहिए कि उसकी मिट्टी की वास्तविक स्थिति क्या है, किस फसल के लिए कौन-सी तकनीक उपयोगी है, उत्पादन लागत कैसे कम की जा सकती है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कैसे हो सकता है।

Rajeev Singh receiving a traditional Tilak and floral welcome at Garhwa University during his participation as an Industry Expert at the First Convocation.
गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर उद्योग विशेषज्ञ के रूप में पहुंचे संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह का तिलक एवं पुष्पों के साथ पारंपरिक स्वागत।

“प्रयोगशाला से खेत तक पहुँचना चाहिए कृषि नवाचार”

राजीव सिंह के कृषि संबंधी दृष्टिकोण का एक प्रमुख सिद्धांत है कि वैज्ञानिक उपलब्धि का मूल्य उसके व्यावहारिक प्रभाव से तय होना चाहिए।

“कृषि अनुसंधान की यात्रा प्रयोगशाला या शोध पत्र पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। उसकी वास्तविक सफलता किसान के खेत में दिखाई देनी चाहिए। विश्वविद्यालय ज्ञान विकसित करें, उद्यम उसे व्यावहारिक रूप देने में सहयोग करें और किसान उस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में रहे।”

यही सोच विश्वविद्यालय–उद्योग–किसान सहयोग के एक ऐसे मॉडल की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जिसमें प्रत्येक पक्ष अपनी विशिष्ट क्षमता के साथ योगदान करे।

विश्वविद्यालय अनुसंधान और विशेषज्ञता दें, कृषि उद्यम तकनीक को व्यावहारिक तथा सुलभ बनाने में सहयोग करें और किसानों के अनुभव से शोध तथा समाधान दोनों को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ा जाए।

खेती से आगे—ग्रामीण उद्यमिता की नई संभावनाएँ

राजीव सिंह कृषि को केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि ग्रामीण आर्थिक अवसरों के निर्माण से भी जोड़कर देखते हैं।

भारत के ग्रामीण युवाओं के सामने कृषि आधारित उद्यमिता का एक बड़ा क्षेत्र विकसित हो रहा है। जैविक कृषि इनपुट, माइक्रोबियल तकनीक, पौध पोषण, नर्सरी, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन, डिजिटल कृषि सेवाएँ और बाजार संपर्क जैसे क्षेत्रों में नए उद्यम विकसित किए जा सकते हैं।

ऐसे अवसर तभी व्यापक प्रभाव पैदा करेंगे जब युवाओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल, तकनीकी मार्गदर्शन और उद्यमिता की समझ भी मिले।

इसीलिए विश्वविद्यालयों की भूमिका डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहकर छात्रों को वास्तविक कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समस्याओं से जोड़ने की भी हो सकती है।

छात्रों को रोजगार खोजने वाला ही नहीं, अवसर बनाने वाला बनाना

कृषि शिक्षा का भविष्य युवाओं को केवल नौकरी के लिए तैयार करने में नहीं, बल्कि उन्हें समस्या पहचानने, समाधान विकसित करने और उद्यम खड़ा करने की क्षमता देने में भी है।

कृषि विश्वविद्यालय और उद्योग यदि मिलकर छात्रों को किसानों की वास्तविक समस्याओं पर काम करने, फील्ड प्रोजेक्ट करने, तकनीक समझने और कृषि व्यवसाय के मॉडल विकसित करने का अवसर दें, तो ग्रामीण क्षेत्रों से नई पीढ़ी के कृषि उद्यमी तैयार किए जा सकते हैं।

यह मॉडल छात्रों, किसानों और विश्वविद्यालय—तीनों के लिए उपयोगी हो सकता है।

संसार ग्रीन की भूमिका: विज्ञान और किसान के बीच व्यावहारिक सेतु

संसार ग्रीन के माध्यम से राजीव सिंह कृषि विज्ञान और किसान के बीच एक व्यावहारिक सेतु विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

उनका व्यापक उद्देश्य वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, मृदा स्वास्थ्य, जैविक एवं माइक्रोबियल समाधानों, किसान प्रशिक्षण और तकनीक आधारित कृषि सेवाओं को ग्रामीण समुदायों के अधिक करीब लाना है।

शैक्षणिक संस्थानों के साथ संवाद इसी सोच का विस्तार है—जहाँ उद्योग केवल व्यावसायिक भागीदार न होकर ज्ञान को जमीनी प्रभाव में बदलने वाला सहयोगी बने।

विश्वविद्यालय + विज्ञान + उद्यम + किसान

राजीव सिंह भविष्य की कृषि व्यवस्था को चार महत्वपूर्ण स्तंभों के सहयोग के रूप में देखते हैं:

विश्वविद्यालय ज्ञान विकसित करे।
वैज्ञानिक समाधान खोजें।
उद्यम समाधान को व्यावहारिक और सुलभ बनाए।
और किसान पूरी व्यवस्था के केंद्र में रहे।

गढ़वा विश्वविद्यालय में हुआ संवाद इसी सोच को आगे बढ़ाने का अवसर बना।

आगे किसान प्रशिक्षण, विशेषज्ञ संवाद, तकनीकी मार्गदर्शन, छात्रों के लिए कृषि उद्यमिता संबंधी गतिविधियों और संस्थागत ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ ग्रामीण कृषि व्यवस्था के लिए उपयोगी मॉडल विकसित कर सकती हैं।

Rajeev Singh with Vice-Chancellor Dr. M. K. Singh and the university team at Garhwa University during the First Convocation and academic interaction.
गढ़वा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम. के. सिंह एवं विश्वविद्यालय की टीम के साथ संसार ग्रीन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राजीव सिंह—कृषि शिक्षा, किसान कल्याण और ग्रामीण उद्यमिता को आगे बढ़ाने पर सार्थक संवाद।

ज्ञान तभी सार्थक है, जब समाज तक पहुँचे

गढ़वा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उद्योग विशेषज्ञ के रूप में राजीव सिंह की सहभागिता उनके व्यापक सार्वजनिक दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करती है—शिक्षा और संस्थागत ज्ञान का अंतिम उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।

कृषि के संदर्भ में इसका अर्थ है कि शोध किसान तक पहुँचे, तकनीक स्थानीय समस्याओं का समाधान करे, युवाओं को नए अवसर मिलें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक सक्षम बने।

राजीव सिंह इसी दिशा में शैक्षणिक संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों, उद्यमियों, युवाओं और किसानों के बीच सहयोग का एक मजबूत नेटवर्कविकसित करने की आवश्यकता देखते हैं।

उनकी सोच का सार एक सरल सिद्धांत में समाहित है:

“ज्ञान विश्वविद्यालय में जन्म ले सकता है, लेकिन उसकी वास्तविक पहचान तब बनती है जब वह खेत, किसान और समाज के जीवन में बदलाव लाए।”

The post कृषि शिक्षा से खेत तक: गढ़वा विश्वविद्यालय में राजीव सिंह का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण appeared first on Sansar Green.

]]>
प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन सूखे पत्तों से तैयार करेंगे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद https://sansargreen.org/prabhat-khabar-iit-ism-dhanbad-sansar-green-organic-manure-2/ Sat, 19 Sep 2026 11:54:49 +0000 https://sansargreen.org/?p=1933 16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रभात खबर ने IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल को प्रमुखता से दी जगह; किसानों, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती को मिलेगा लाभ धनबाद | 16 सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद Read More ...

The post प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन सूखे पत्तों से तैयार करेंगे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद appeared first on Sansar Green.

]]>
16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में प्रभात खबर ने IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल को प्रमुखता से दी जगह; किसानों, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती को मिलेगा लाभ

धनबाद | 16 सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड की सूखे पत्तों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की पहल को प्रमुख हिंदी समाचार पत्र प्रभात खबर ने अपने धनबाद संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

16 सितंबर 2026 को प्रकाशित खबर में प्रभात खबर ने “आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा” शीर्षक के साथ इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कचरा प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती से जोड़कर प्रस्तुत किया है।

सूखे पत्तों को जलाने के बजाय बनेगी उपयोगी जैविक खाद

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर परिसर में पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की तैयारी कर रहा है।

इस पहल का उद्देश्य सूखी पत्तियों को जलाने या कचरे में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपयोग कर मिट्टी की सेहत सुधारना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।

प्रस्तावित परियोजना के तहत कैंपस और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाली सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से विघटित किया जाएगा। इसके बाद उनमें आवश्यक जैविक पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव मिलाकर गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार करने की योजना है।

इस प्रक्रिया को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व → लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → बेहतर मृदा स्वास्थ्य

IIT (ISM), संसार ग्रीन और जिला कृषि विभाग की सहभागिता

प्रभात खबर ने अपनी रिपोर्ट में इस पहल से जुड़े प्रमुख लोगों और संस्थाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया है।

परियोजना पर हुई चर्चा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक कुमार दास, संसार ग्रीन के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

प्रभात खबर की रिपोर्ट में इस परियोजना को IIT (ISM), संसार ग्रीन और धनबाद के जिला कृषि विभाग के साझा प्रयास से आगे बढ़ाए जाने का उल्लेख किया गया है।

कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना

इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि तैयार जैविक खाद का उपयोग केवल संस्थान के भीतर सीमित रखने की योजना नहीं है।

प्रभात खबर के अनुसार, तैयार खाद का उपयोग संस्थान के उद्यान, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मिट्टी के पुनरुद्धार में किया जा सकेगा।

इसके साथ ही इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है। इस तरह सूखी पत्तियों के प्रबंधन से शुरू होने वाली पहल का लाभ कृषि और मृदा स्वास्थ्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर विशेष ध्यान

संसार ग्रीन की प्रस्तावित प्रक्रिया सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित नहीं है। इसमें वैज्ञानिक रूप से विघटित जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों के साथ लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध करने की परिकल्पना की गई है।

इसका उद्देश्य ऐसा मूल्यवर्धित जैविक उत्पाद तैयार करना है जो मिट्टी में जैविक पदार्थ की उपलब्धता बढ़ाने के साथ मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं को भी सहयोग दे सके।

संसार ग्रीन मृदा स्वास्थ्य, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, जैविक कृषि और जैव-आधारित कृषि समाधानों पर काम कर रहा है। इसलिए यह परियोजना कंपनी के मौजूदा कार्यक्षेत्र को sustainable green-waste management के साथ जोड़ती है।

बड़े संस्थानों के लिए भी बन सकता है मॉडल

प्रभात खबर की रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास के हवाले से सूखी पत्तियों को कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का महत्वपूर्ण स्रोत बताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संस्थान ऐसा मॉडल तैयार करना चाहता है जिसे भविष्य में विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, उद्योगों, हाउसिंग सोसायटियों और नगर निकायों द्वारा भी अपनाया जा सके।

इस दृष्टिकोण से परियोजना का महत्व IIT (ISM) धनबाद परिसर में उत्पन्न सूखी पत्तियों के प्रबंधन से आगे जाता है। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह बड़े परिसरों में उत्पन्न होने वाले green waste के स्थानीय और उपयोगी प्रबंधन का एक उदाहरण बन सकता है।

प्रभात खबर ने किसानों से जुड़े पहलू को किया प्रमुखता से रेखांकित

इस खबर की खास बात यह है कि प्रभात खबर ने परियोजना के पर्यावरणीय पक्ष के साथ किसानों को होने वाले संभावित लाभ को भी अपने मुख्य शीर्षक में स्थान दिया है।

“आईआईटी आईएसएम में पत्तों से तैयार होगी पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद, किसानों को होगा फायदा”—यह शीर्षक परियोजना के Waste-to-Wealth मॉडल के साथ उसके कृषि उपयोग को भी सामने लाता है।

संसार ग्रीन के लिए इस पहल का उद्देश्य भी केवल सूखी पत्तियों का निस्तारण नहीं, बल्कि उनसे ऐसा उपयोगी जैविक संसाधन तैयार करना है जिसे मृदा स्वास्थ्य, पौधरोपण, नर्सरी और जैविक कृषि से जोड़ा जा सके।

Waste to Wealth से मिट्टी की सेहत तक

इस पहल के केंद्र में एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण विचार है—सूखी पत्तियां कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का एक उपयोगी स्रोत हैं।

उन्हें जलाने या फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से संसाधित करके मिट्टी तक वापस पहुंचाया जा सकता है।

सूखी पत्तियां → जैविक संसाधन → पोषक एवं माइक्रोबियल संवर्धन → समृद्ध जैविक खाद → स्वस्थ मिट्टी

प्रभात खबर जैसे प्रमुख समाचार पत्र द्वारा इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और जैविक कृषि से जुड़े इस विषय को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण है।

संसार ग्रीन का प्रयास विज्ञान, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक कार्यान्वयन को जोड़ते हुए ऐसे समाधान विकसित करना है, जिनसे जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और उन्हें पुनः मिट्टी के प्राकृतिक चक्र में लौटाया जा सके।

The post प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन सूखे पत्तों से तैयार करेंगे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद appeared first on Sansar Green.

]]>
दैनिक हिन्दुस्तान में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल से सूखे पत्ते बनेंगे समृद्ध जैविक खाद https://sansargreen.org/dainik-hindustan-iit-ism-dhanbad-sansar-green-dry-leaves/ Sat, 19 Sep 2026 09:33:49 +0000 https://sansargreen.org/?p=1928 16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में दैनिक हिन्दुस्तान ने “सूखे पत्तों को ऑर्गेनिक खाद में बदलने की तैयारी” शीर्षक से प्रकाशित की खबर धनबाद | 16 सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन Read More ...

The post दैनिक हिन्दुस्तान में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल से सूखे पत्ते बनेंगे समृद्ध जैविक खाद appeared first on Sansar Green.

]]>
16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में दैनिक हिन्दुस्तान ने “सूखे पत्तों को ऑर्गेनिक खाद में बदलने की तैयारी” शीर्षक से प्रकाशित की खबर

धनबाद | 16 सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड की सूखे पत्तों को उपयोगी जैविक खाद में बदलने की प्रस्तावित पहल को दैनिक हिन्दुस्तान ने अपने धनबाद संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

16 सितंबर 2026 को प्रकाशित खबर में दैनिक हिन्दुस्तान ने “सूखे पत्तों को ऑर्गेनिक खाद में बदलने की तैयारी” शीर्षक के साथ इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया है।

[यहां दैनिक हिन्दुस्तान की प्रकाशित न्यूज कटिंग लगाएं]

सूखे पत्तों को कचरा नहीं, उपयोगी संसाधन बनाने की पहल

दैनिक हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर पेड़ों से गिरने वाले सूखे और बेकार पत्तों को पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद में बदलने की तैयारी कर रहा है।

इस पहल का उद्देश्य सूखी पत्तियों को जलाने या बेकार फेंकने के बजाय उनका उपयोग करना, मिट्टी की सेहत सुधारना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।

बड़े संस्थागत परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी मात्रा में सूखी पत्तियां निकलती हैं। इन्हें जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ सकता है, जबकि गलत तरीके से फेंकने पर इनमें मौजूद उपयोगी जैविक पदार्थ भी बेकार चला जाता है।

इसी समस्या को एक उपयोगी संसाधन में बदलना इस पहल की मूल अवधारणा है।

IIT (ISM) धनबाद में हुई रणनीतिक चर्चा

दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट में परियोजना को लेकर आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में हुई रणनीतिक चर्चा का भी उल्लेख किया गया है।

इस चर्चा में प्रो. आलोक कुमार दास, डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद; संसार ग्रीन के निदेशक राजीव सिंह; धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना; तथा आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

परियोजना के तहत सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक प्रक्रिया से उपयोगी जैविक खाद में बदलने और उन्हें मिट्टी के लिए पुनः उपयोगी बनाने की दिशा में काम किया जाना प्रस्तावित है।

पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ने का प्रयास

संसार ग्रीन के लिए यह पहल केवल सूखी पत्तियों के निस्तारण का विषय नहीं है। इसका उद्देश्य green waste management को मृदा स्वास्थ्य और जैविक कृषि से जोड़ना है।

सूखी पत्तियां अपने आप में जैविक पदार्थ का स्रोत हैं। उचित वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से इन्हें उपयोगी जैविक खाद में परिवर्तित कर पुनः मिट्टी तक पहुंचाया जा सकता है।

इस मॉडल का मूल विचार है:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक प्रसंस्करण → समृद्ध जैविक खाद → बेहतर मृदा स्वास्थ्य → जैविक खेती

इस प्रकार जो जैविक पदार्थ पेड़ और मिट्टी से उत्पन्न हुआ है, उसे कचरे के रूप में नष्ट करने के बजाय दोबारा मिट्टी के जैविक चक्र में वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।

दैनिक हिन्दुस्तान की खबर ने पहल के पर्यावरणीय महत्व को किया रेखांकित

दैनिक हिन्दुस्तान ने अपनी रिपोर्ट में विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि सूखी पत्तियों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जबकि उनका वैज्ञानिक उपयोग पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की सेहत—दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।

रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास के हवाले से भी इस विचार को सामने रखा गया है कि सूखे पत्ते केवल कचरा नहीं, बल्कि जैविक पदार्थ का एक उपयोगी स्रोत हैं।

संसार ग्रीन का प्रयास इसी संसाधन को वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से उपयोग में लाकर Waste-to-Wealth की अवधारणा को जमीन पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना है।

संसार ग्रीन की प्रतिबद्धता

संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड मृदा स्वास्थ्य, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, जैविक कृषि और पर्यावरण-अनुकूल समाधानों पर कार्य कर रहा है। IIT (ISM) धनबाद के साथ प्रस्तावित यह पहल संस्थागत स्तर पर उत्पन्न होने वाले सूखे पत्तों के बेहतर उपयोग का एक व्यावहारिक मॉडल विकसित करने की दिशा में प्रयास है।

दैनिक हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख समाचार पत्र में इस पहल का प्रकाशन इस विषय को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संसार ग्रीन का मानना है कि सूखी पत्तियों को समस्या के रूप में देखने के बजाय उन्हें मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में देखने की आवश्यकता है—

“कचरे में नहीं, मिट्टी में लौटें सूखे पत्ते।”

The post दैनिक हिन्दुस्तान में प्रमुखता से प्रकाशित: IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन की पहल से सूखे पत्ते बनेंगे समृद्ध जैविक खाद appeared first on Sansar Green.

]]>
IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन मिलकर सूखे पत्तों से बनाएंगे पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद https://sansargreen.org/iit-ism-%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2/ Sat, 19 Sep 2026 06:57:26 +0000 https://sansargreen.org/?p=1922 सूखी पत्तियों को कचरे में फेंकने या जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने की पहल; लाभकारी सूक्ष्मजीवों और आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध कर तैयार की जाएगी जैविक खाद धनबाद | सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान Read More ...

The post IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन मिलकर सूखे पत्तों से बनाएंगे पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद appeared first on Sansar Green.

]]>
सूखी पत्तियों को कचरे में फेंकने या जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने की पहल; लाभकारी सूक्ष्मजीवों और आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध कर तैयार की जाएगी जैविक खाद

धनबाद | सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और संस्थान में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन मिशन प्राइवेट लिमिटेड मिलकर परिसर में पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियों को उपयोगी जैविक खाद में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रस्तावित परियोजना के तहत सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से अपघटित कर उनमें आवश्यक पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव मिलाकर पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद तैयार की जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य सूखी पत्तियों को केवल कचरा मानकर नष्ट करने के बजाय उन्हें दोबारा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन में बदलना है। इससे हरित कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक व्यावहारिक मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

IIT (ISM) धनबाद में परियोजना पर हुई चर्चा

परियोजना को लेकर आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में हुई रणनीतिक चर्चा में डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक कुमार दास, संसार ग्रीन के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना तथा आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

बैठक में सूखी पत्तियों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उत्पादन प्रक्रिया, आवश्यक संसाधनों, माइक्रोबियल एनरिचमेंट, तैयार जैविक खाद के उपयोग और परियोजना को व्यावहारिक रूप से लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

[यहां सोफे पर बैठकर चर्चा वाली तस्वीर लगाएं]

सूखी पत्तियों को वापस मिट्टी तक पहुंचाने का प्रयास

पेड़ों से गिरने वाली पत्तियां प्राकृतिक रूप से जैविक पदार्थ का स्रोत होती हैं। लेकिन बड़ी मात्रा में जमा होने पर इनके प्रबंधन की समस्या उत्पन्न होती है। पत्तियों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जबकि उन्हें सामान्य कचरे के साथ फेंक देने पर उनमें मौजूद जैविक पदार्थ का उपयोग नहीं हो पाता।

इसी समस्या को अवसर में बदलते हुए प्रस्तावित परियोजना में सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से डीकंपोज किया जाएगा। इसके बाद तैयार जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध कर मूल्यवर्धित जैविक खाद के रूप में विकसित करने की योजना है।

प्रस्तावित प्रक्रिया:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्वों का संवर्धन → लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → मिट्टी में पुनः उपयोग

मृदा स्वास्थ्य और माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान

संसार ग्रीन इस पहल को केवल सामान्य पत्ती कम्पोस्टिंग तक सीमित रखने के बजाय मृदा स्वास्थ्य से जोड़कर विकसित करने पर काम कर रहा है।

प्रस्तावित प्रक्रिया में वैज्ञानिक रूप से अपघटित पत्तियों में आवश्यक जैविक पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों को शामिल किया जाएगा। इससे तैयार खाद का उपयोग कैंपस गार्डन, नर्सरी, पौधरोपण, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और मृदा सुधार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकेगा।

संसार ग्रीन के लिए यह परियोजना मृदा स्वास्थ्य, माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी और जैविक कृषि से जुड़े अपने अनुभव को sustainable green-waste management के साथ जोड़ने का अवसर भी है।

परियोजना में संसार ग्रीन करेगा निवेश

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत परियोजना के लिए आवश्यक मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और अन्य परिचालन खर्च संसार ग्रीन द्वारा वहन किए जाएंगे। वहीं आईआईटी (आईएसएम) धनबाद उत्पादन और तैयार जैविक खाद के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराएगा।

इस प्रकार संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर और संसार ग्रीन की तकनीकी एवं परिचालन क्षमता को एक साथ जोड़कर एक व्यावहारिक Waste-to-Wealth मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

Rajeev Singh of Sansar Green during a meeting at IIT (ISM) Dhanbad on the project to convert dry leaves into enriched organic manure.
IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green discuss the proposed project for scientific utilisation of dry leaves and production of enriched organic manure.

कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना

इस परियोजना के तहत तैयार जैविक खाद का उपयोग आईआईटी (आईएसएम) परिसर के उद्यानों, नर्सरी, पौधरोपण और लैंडस्केपिंग में किया जा सकेगा। इसके साथ इसे किसानों, बागवानों, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है।

इससे परियोजना का उद्देश्य केवल कैंपस के सूखे पत्तों का निस्तारण करना नहीं रहेगा, बल्कि उनसे तैयार उपयोगी जैविक संसाधन को कृषि, बागवानी और मृदा स्वास्थ्य से जोड़ना भी होगा।

भविष्य में सफल मॉडल विकसित होने पर विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, उद्योगों, हाउसिंग सोसायटियों और नगर निकायों जैसे ऐसे स्थानों पर भी इस अवधारणा को अपनाने की संभावना देखी जा सकती है, जहां बड़ी मात्रा में biodegradable green waste उत्पन्न होता है। इस व्यापक उपयोग की संभावना का उल्लेख परियोजना से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों में भी किया गया है।

Waste to Wealth: कचरे से संसाधन की ओर

इस पहल का मूल विचार बहुत सरल है—पेड़ से गिरने के बाद पत्ती का उपयोग समाप्त नहीं हो जाता।

उचित वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से उसी पत्ती के जैविक पदार्थ को उपयोगी खाद में बदलकर दोबारा मिट्टी तक पहुंचाया जा सकता है।

संसार ग्रीन और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की यह पहल इसी प्राकृतिक चक्र को विज्ञान और माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने का प्रयास है।

सूखी पत्तियां → जैविक संसाधन → समृद्ध जैविक खाद → स्वस्थ मिट्टी → बेहतर पौध विकास

इस प्रकार जो जैविक पदार्थ मिट्टी और पेड़ों से आया है, उसे वैज्ञानिक तरीके से उपयोगी बनाकर पुनः मिट्टी तक पहुंचाना इस परियोजना की मूल अवधारणा है।

Related Media Coverage

इस पहल को मीडिया में भी स्थान मिला है। 15 सितंबर 2026 को दैनिक जागरण ने परियोजना पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें सूखी पत्तियों से जैविक खाद तैयार करने, संसार ग्रीन की भूमिका और तैयार खाद को किसानों तथा अन्य उपयोगकर्ताओं तक उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख किया गया।

Read the Dainik Jagran coverage

Three Societies ने भी 15 सितंबर 2026 को इस पहल पर रिपोर्ट प्रकाशित की और इसे sustainable waste management, soil health तथा organic farming से जोड़ा।

Read the Three Societies coverage

The post IIT (ISM) धनबाद और संसार ग्रीन मिलकर सूखे पत्तों से बनाएंगे पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद appeared first on Sansar Green.

]]>
Media Coverage: IIT (ISM) Dhanbad–Sansar Green की “सूखे पत्तों से समृद्ध जैविक खाद” पहल को प्रमुख मीडिया में स्थान https://sansargreen.org/iit-ism-dhanbad-sansar-green-media-dry-leaves-organic-manure/ Sat, 19 Sep 2026 05:30:58 +0000 https://sansargreen.org/?p=1916 Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में प्रकाशित खबरों ने Waste-to-Wealth, Soil Health और Sustainable Green Waste Management की पहल को किया रेखांकित धनबाद | सितंबर 2026 आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और उसके इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Private Limited Read More ...

The post Media Coverage: IIT (ISM) Dhanbad–Sansar Green की “सूखे पत्तों से समृद्ध जैविक खाद” पहल को प्रमुख मीडिया में स्थान appeared first on Sansar Green.

]]>
Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में प्रकाशित खबरों ने Waste-to-Wealth, Soil Health और Sustainable Green Waste Management की पहल को किया रेखांकित

धनबाद | सितंबर 2026

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और उसके इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Sansar Green Mission Private Limited द्वारा परिसर में गिरने वाली सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध जैविक खाद में बदलने की प्रस्तावित पहल को विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रमुखता से स्थान मिला है।

Dainik Jagran सहित प्रिंट मीडिया और डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती और Sustainable Waste Management से जोड़ते हुए प्रकाशित किया है। Dainik Jagran की ऑनलाइन रिपोर्ट 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुई, जबकि उपलब्ध समाचार कटिंग में 16 सितंबर 2026 के धनबाद संस्करण में भी इस विषय को स्थान दिया गया है।

Dainik Bhaskar newspaper coverage of IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green’s initiative to return dry leaves to soil through enriched organic manure.
Dainik Bhaskar highlights the IIT (ISM) Dhanbad–Sansar Green initiative focused on turning dry leaves into a useful resource for soil and agriculture.

सूखे पत्ते कचरा नहीं, मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन

इस पहल का मूल विचार परिसर में गिरने वाली सूखी पत्तियों को जलाने या सामान्य कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक उपयोग करना है।

प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत सूखी पत्तियों को वैज्ञानिक तरीके से डीकंपोज किया जाएगा और तैयार जैविक पदार्थ को आवश्यक पोषक तत्वों तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी जैविक खाद विकसित करना है जिसका उपयोग मृदा स्वास्थ्य, पौधरोपण, नर्सरी, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और Soil Restoration जैसे क्षेत्रों में किया जा सके।

यह अवधारणा एक सरल चक्र पर आधारित है:

सूखी पत्तियां → वैज्ञानिक अपघटन → पोषक तत्व एवं लाभकारी सूक्ष्मजीव → समृद्ध जैविक खाद → मिट्टी में वापसी

Dainik Jagran ने प्रमुखता से प्रकाशित की पहल

Dainik Jagran ने “IIT (ISM) की पहल: सूखे पत्ते अब बनेंगे जैविक खाद, पर्यावरण और खेती को मिलेगा लाभ” शीर्षक से इस परियोजना पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की।

रिपोर्ट में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के प्रस्तावित मॉडल के साथ-साथ सूखी पत्तियों के वैज्ञानिक अपघटन, पोषक तत्वों एवं beneficial microorganisms के उपयोग और तैयार खाद के संभावित उपयोगों का उल्लेख किया गया है।

Read the Dainik Jagran coverage

Dainik Bhaskar में “कचरे में नहीं, खेत और मिट्टी में लौटेंगे सूखे पत्ते”

साझा की गई Dainik Bhaskar की मीडिया कटिंग में पहल को “कचरे में नहीं, खेत और मिट्टी में लौटेंगे सूखे पत्ते, आईआईटी आईएसएम की बड़ी पहल” शीर्षक के साथ प्रस्तुत किया गया है।

रिपोर्ट का मुख्य फोकस इस विचार पर है कि संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाली सूखी पत्तियों में मौजूद जैविक पदार्थ को नष्ट करने के बजाय उसे मिट्टी में वापस लौटाया जाए।

यह दृष्टिकोण Waste-to-Wealth के साथ Circular Economy की उस अवधारणा को भी सामने लाता है, जिसमें जैविक कचरे को उसी चक्र में वापस लाने का प्रयास किया जाता है जहां से वह उत्पन्न हुआ था।

डिजिटल मीडिया में भी मिली जगह

Three Societies ने 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, Sustainable Waste Management, Soil Health और Organic Farming से जोड़कर प्रस्तुत किया।

रिपोर्ट में IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green द्वारा सूखे पत्तों से पोषक जैविक खाद तैयार करने की योजना के साथ यह भी बताया गया कि तैयार खाद का उपयोग कैंपस गार्डन, नर्सरी, प्लांटेशन, लैंडस्केपिंग, जैविक खेती और Soil Restoration में किया जा सकता है।

Read the Three Societies coverage

राजीव सिंह और Sansar Green की भूमिका

इस प्रस्तावित परियोजना पर हुई रणनीतिक चर्चा में IIT (ISM) Dhanbad के Dean, Innovation & Corporate Relations प्रो. आलोक कुमार दास, Sansar Green के निदेशक राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना और IIT (ISM) के सहायक कुलसचिव मृत्युंजय शर्मा शामिल हुए।

प्रस्तावित व्यवस्था में मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और अन्य परिचालन खर्च Sansar Green द्वारा वहन किए जाने हैं, जबकि IIT (ISM) Dhanbad उत्पादन और तैयार खाद के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराएगा।

इससे संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप की कार्यान्वयन क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कैंपस से किसानों तक पहुंचाने की योजना

इस पहल का उद्देश्य केवल IIT (ISM) परिसर की सूखी पत्तियों का प्रबंधन करना नहीं है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार तैयार खाद का उपयोग कैंपस के उद्यान, नर्सरी, पौधरोपण और लैंडस्केपिंग में करने के साथ किसानों, गार्डनर्स, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है।

यदि यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, औद्योगिक परिसरों, हाउसिंग सोसायटियों और स्थानीय निकायों जैसे बड़े green-waste generators के लिए भी इसी प्रकार के मॉडल की उपयोगिता पर विचार किया जा सकता है। Dainik Jagran में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रो. आलोक कुमार दास ने भी ऐसे व्यापक मॉडल की परिकल्पना का उल्लेख किया है।

IIT (ISM) और Sansar Green के सहयोग का विस्तार

यह पहल IIT (ISM) Dhanbad और Sansar Green के बीच पहला सहयोग नहीं है। IIT (ISM) के आधिकारिक अगस्त 2025 प्रेस रिलीज के अनुसार, CIIE, IIT (ISM) Dhanbad Foundation और Sansar Green ने AI-powered organic farming solutions के लिए रणनीतिक सहयोग किया था। इसमें AI-driven soil-health analysis, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार crop recommendations और native microbial strains के आधार पर region-specific biofertilizer production जैसे घटक शामिल थे।

इस संदर्भ में सूखी पत्तियों से enriched organic manure विकसित करने की प्रस्तावित पहल, soil health, microbial technology और sustainable agriculture से जुड़े व्यापक सहयोग का एक व्यावहारिक विस्तार है।

Waste to Wealth से Soil to Sustainability की ओर

Dainik Jagran, Dainik Bhaskar और डिजिटल मीडिया में मिली कवरेज इस पहल के एक साझा संदेश को सामने लाती है—सूखी पत्तियां केवल कचरा नहीं हैं।

वैज्ञानिक प्रक्रिया, पोषक तत्वों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के माध्यम से इन्हें दोबारा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।

इस पहल का मूल विचार इसी चक्र में समाहित है:

Waste to Wealth | Soil Health | Beneficial Microorganisms | Organic Farming | Circular Economy

सूखी पत्तियां मिट्टी से आती हैं और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उन्हें उपयोगी जैविक पदार्थ के रूप में दोबारा मिट्टी तक पहुंचाना इस परियोजना की केंद्रीय अवधारणा है।

Dainik Jagran coverage dated September 2026 featuring the IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green project for converting dry leaves into enriched organic manure.
Dainik Jagran reports on IIT (ISM) Dhanbad and Sansar Green’s plan to scientifically transform dry leaves into nutrient-rich organic manure.

The post Media Coverage: IIT (ISM) Dhanbad–Sansar Green की “सूखे पत्तों से समृद्ध जैविक खाद” पहल को प्रमुख मीडिया में स्थान appeared first on Sansar Green.

]]>